About योगेंद्र गौतम
नई पीढ़ी कवि-लेखक और अनुवादक।
Selected Quotes
Poetry & Stories
अगली सुबह
रात को जब तुम्हारे केश खो जाएँगेसघन अँधेरे में
प्रतीक्षा
रात फैली है, चाँद खिला हैआज पूरा चाँद है,
आसमान के पार
बचपन में आकाश के अनगिनत तारे देखकरउन्हें गिनने का ख़याल आता था।
खो रहे हैं हम
पाते जाने (?) के क्रम में जाने कितना कुछ खो रहे हैं हम!हम खो चुके हैं अपने संबंधी,
तुम्हारे लिए
मेरी आँखें धरती की आँखों के बहुत बाद खुली हैंपर अपनी आँखें खुलने के बाद मैं इसे जगे ही देखता हूँ
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योगेंद्र गौतम: Quick Answers
Who is योगेंद्र गौतम?
नई पीढ़ी कवि-लेखक और अनुवादक।
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Poems & Stories by योगेंद्र गौतम
अगली सुबह
रात को जब तुम्हारे केश खो जाएँगेसघन अँधेरे में
प्रतीक्षा
रात फैली है, चाँद खिला हैआज पूरा चाँद है,
आसमान के पार
बचपन में आकाश के अनगिनत तारे देखकरउन्हें गिनने का ख़याल आता था।
खो रहे हैं हम
पाते जाने (?) के क्रम में जाने कितना कुछ खो रहे हैं हम!हम खो चुके हैं अपने संबंधी,
तुम्हारे लिए
मेरी आँखें धरती की आँखों के बहुत बाद खुली हैंपर अपनी आँखें खुलने के बाद मैं इसे जगे ही देखता हूँ
ध्वनि और प्रकाश
परदों के कनटोप ओढ़कर दीवार से टिकी खिड़की का मुँहसूरज की पीठ पर खुलता है और
उनके चले जाने पर
एक धीमी धुन के बाद दो जगहों के बीच जैसे खिंच चुका है परदा,दोनों जगहें दो अलग दुनियाएँ हो चुकी हैं।
अभी
अभी बरसकर इकट्ठा हुए पानी के चहबच्चों मेंउन स्मृतियों के बिंब थे
इस रात्रि में
तुम्हें हाँक लगाकरमैं वापस बैठ गया।
सबसे लंबी खोज
मैं दुनिया में तुम्हें ढूँढ़ता हूँ,तुम में ख़ुद को,
सुबह का गीत
रात भर ओस में डूबी डाली पर बैठकर चिड़िया कुछ कहकर गई है।सूर्य के ललाट से उठती किरणें धरती का तन छूती हैं और उगते फागन की केसरी रंगत गेहूँ की हरित बालियों में घुल जाती है।
दूरी और भाषा
मैं कभी समुद्र तक नहीं गयान ही समुद्र कभी मुझ तक आया
Selected Quotes by योगेंद्र गौतम (चुनिंदा उद्धरण)
एक धीमी धुन के बाद दो जगहों के बीच जैसे खिंच चुका है परदा,दोनों जगहें दो अलग दुनियाएँ हो चुकी हैं।परदों के कनटोप ओढ़कर दीवार से टिकी खिड़की का मुँहसूरज की पीठ पर खुलता है औरबचपन में आकाश के अनगिनत तारे देखकरउन्हें गिनने का ख़याल आता था।पाते जाने (?) के क्रम में जाने कितना कुछ खो रहे हैं हम!हम खो चुके हैं अपने संबंधी,तुम्हें हाँक लगाकरमैं वापस बैठ गया।मैं दुनिया में तुम्हें ढूँढ़ता हूँ,तुम में ख़ुद को,Videos on योगेंद्र गौतम
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