About Sunderdas
Sunderdas (1596–1689) was a noted saint, poet, philosopher and social reformer of medieval India. He was a disciple of Dadu Dayal. Sunderdas was born in Dausa in Rajasthan state in India. Sant Sunderdas composed about 48 books. He is revered as the Sankaracharya of Hindi literature, and is popularly known as Sant Kavi…
Selected Quotes
Poetry & Stories
तेल जरै बाती जरै
तेल जरै बाती जरै, दीपक जरै न कोइ।दीपक जरताँ सब कहै, भारी अजरज होइ॥
गज अलि मीन पतंग मृग
गज अलि मीन पतंग मृग, इक-इक दोष बिनाश।जाके तन पाँचौं बसै, ताकी कैसी आश॥
गेह तज्यो अरु नेह तज्यो पुनि खेह लगाई
गेह तज्यो अरु नेह तज्यो पुनि खेह लगाई कै देह संवारी .मेह सहे सिर, सीत सहे तन धूप समै जो पंचागिनि बारी.
बोलिए तौ तब जब बोलिबे की बुद्धि होय
बोलिए तौ तब जब बोलिबे की बुद्धि होय,ना तौ मुख मौन गहि चुप होय रहिए.
पति ही सूं प्रेम होय
पति ही सूं प्रेम होय, पति ही सूं नेम होय,पति ही सूं छेम होय , पति ही सूं रात है.
About Sunderdas
Sunderdas: Quick Answers
Who is Sunderdas?
Sunderdas (1596–1689) was a noted saint, poet, philosopher and social reformer of medieval India. He was a disciple of Dadu Dayal.
When was Sunderdas born?
Sunderdas was born on 1 January 1596.
When did Sunderdas die?
Sunderdas passed away on 1 January 1689.
Where can I read Sunderdas's poetry?
Kavishala has 8 poems and stories by Sunderdas, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Sunderdas
तेल जरै बाती जरै
तेल जरै बाती जरै, दीपक जरै न कोइ।दीपक जरताँ सब कहै, भारी अजरज होइ॥
गज अलि मीन पतंग मृग
गज अलि मीन पतंग मृग, इक-इक दोष बिनाश।जाके तन पाँचौं बसै, ताकी कैसी आश॥
गेह तज्यो अरु नेह तज्यो पुनि खेह लगाई
गेह तज्यो अरु नेह तज्यो पुनि खेह लगाई कै देह संवारी .मेह सहे सिर, सीत सहे तन धूप समै जो पंचागिनि बारी.
बोलिए तौ तब जब बोलिबे की बुद्धि होय
बोलिए तौ तब जब बोलिबे की बुद्धि होय,ना तौ मुख मौन गहि चुप होय रहिए.
पति ही सूं प्रेम होय
पति ही सूं प्रेम होय, पति ही सूं नेम होय,पति ही सूं छेम होय , पति ही सूं रात है.
सुनत नगारे चोट बिगसै कमलमुख
सुनत नगारे चोट बिगसै कमलमुख,अधिक उछाह फूल्यो मात है न तन में.
ब्रह्म तें पुरुष अरु पकृति प्रगट भई
ब्रह्म तें पुरुष अरु पकृति प्रगट भई,प्रकृति तें महत्तत्व,पुनि अहंकार है .
एकनि के बचन सुनत अति सुख होई
एकनि के बचन सुनत अति सुख होई ,फल से झरत हैं अधिक मनभावने.
Selected Quotes by Sunderdas (चुनिंदा उद्धरण)
गज अलि मीन पतंग मृग, इक-इक दोष बिनाश।जाके तन पाँचौं बसै, ताकी कैसी आश॥पति ही सूं प्रेम होय, पति ही सूं नेम होय,पति ही सूं छेम होय , पति ही सूं रात है.गेह तज्यो अरु नेह तज्यो पुनि खेह लगाई कै देह संवारी .मेह सहे सिर, सीत सहे तन धूप समै जो पंचागिनि बारी.ब्रह्म तें पुरुष अरु पकृति प्रगट भई,प्रकृति तें महत्तत्व,पुनि अहंकार है .तेल जरै बाती जरै, दीपक जरै न कोइ।दीपक जरताँ सब कहै, भारी अजरज होइ॥बोलिए तौ तब जब बोलिबे की बुद्धि होय,ना तौ मुख मौन गहि चुप होय रहिए.Videos on Sunderdas
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