About Shivadin Ram Joshi
शिवदीन राम जोशी (जन्म : १० जून १९२१, खंडेला, सीकर जिला) एक भारतीय कवि थे। उनके साहित्य में सवैया, मनहर, मतगयंद, कुंडली छंद और कवित्त का प्रयोग तथा धमाल, भजन और गजलों का समावेश है। पद्यात्मक रचनाओं का विषय ज्ञान, वैराग्य, प्रेम, प्रकृति चित्रण, प्रार्थना और उपदेश के साथ-साथ समाज में व्याप्त कुरीतियों, पाखंड, भ्रष्टाचार…
Selected Quotes
Poetry & Stories
कोउ विधि मोहन का बन जाऊँ
कोउ विधि मोहन का बन जाऊँ ।मोहन मेरा मैं मोहन का, प्रेम से गुण नित गाऊँ ।
चला चल मन तू ब्रज की ओर
चला चल मन तू ब्रज की ओर ।जहां गोपियां राधा संग में, नांचे नन्दकिशोर ।।
मोहन खेल रहे है होरी
मोहन खेल रहे है होरी ।गुवाल बाल संग रंग अनेकों, धन्य-धन्य यह होरी ।
अर्जुन दग्ध कियो वन खाण्डव
अर्जुन दग्ध कियो वन खाण्डव,जाय यो काज तो तुच्छ सरायो ।
बरसत मिहरा आया श्रावन
बरसत मिहरा आया श्रावन ।अमृत बरसा, बरसत रिमझिम, धरा हो गई पावन ।
About Shivadin Ram Joshi
Shivadin Ram Joshi: Quick Answers
Who is Shivadin Ram Joshi?
शिवदीन राम जोशी (जन्म : १० जून १९२१, खंडेला, सीकर जिला) एक भारतीय कवि थे। उनके साहित्य में सवैया, मनहर, मतगयंद, कुंडली छंद और कवित्त का प्रयोग तथा धमाल, भजन और गजलों का समावेश है।
When was Shivadin Ram Joshi born?
Shivadin Ram Joshi was born on 10 June 1921.
When did Shivadin Ram Joshi die?
Shivadin Ram Joshi passed away on 27 July 2006.
Where can I read Shivadin Ram Joshi's poetry?
Kavishala has 18 poems and stories by Shivadin Ram Joshi, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Shivadin Ram Joshi
कोउ विधि मोहन का बन जाऊँ
कोउ विधि मोहन का बन जाऊँ ।मोहन मेरा मैं मोहन का, प्रेम से गुण नित गाऊँ ।
चला चल मन तू ब्रज की ओर
चला चल मन तू ब्रज की ओर ।जहां गोपियां राधा संग में, नांचे नन्दकिशोर ।।
मोहन खेल रहे है होरी
मोहन खेल रहे है होरी ।गुवाल बाल संग रंग अनेकों, धन्य-धन्य यह होरी ।
अर्जुन दग्ध कियो वन खाण्डव
अर्जुन दग्ध कियो वन खाण्डव,जाय यो काज तो तुच्छ सरायो ।
बरसत मिहरा आया श्रावन
बरसत मिहरा आया श्रावन ।अमृत बरसा, बरसत रिमझिम, धरा हो गई पावन ।
वेद पुराण गुरु छवूँ शास्त्र, राम रामायण सत्य है नाता
वेद पुराण गुरु छवूँ शास्त्र, राम रामायण सत्य है नाता ।गीता का ज्ञान व ज्ञान गुरु, श्रुति न्याय व सूत्र गुरु समझाता ।
दुःख दर्द का साथी दुनिया में, देखा कोई यार नहीं मिलता
दुःख दर्द का साथी दुनिया में, देखा कोई यार नहीं मिलता |हैं सुख के साथी बहुतेरे, उनसे कोई सार नहीं मिलता ||
सतसंग बिना ना रंग चढ़े
सतसंग बिना ना रंग चढ़े,बिन रंग चढ़े ना भक्ति मिले रे |
रे रंग डारि दियो राधा पर, प्यारा प्रेमी कृष्ण गोपाल
रे रंग डारि दियो राधा पर, प्यारा प्रेमी कृष्ण गोपाल |तन मन भीगा अंग-अंग भीगा, राधा हुई निहाल || रे...
रिद्धी सिद्धी, गजानन्द के संग
रिद्धी सिद्धी, गजानन्द के संग |प्रथम गणेश मनावें प्राणी, चढ़े भक्ति का रंग || रिद्धी....
घन गरजत बरसत है मिहरा
घन गरजत बरसत है मिहरा |बिजरी चमके डर मोहि लागे, प्यारा लगेरी मिहरा || घन...
चरन धूर निज सिर धरो, सरन गुरु की लेय
चरन धूर निज सिर धरो, सरन गुरु की लेय,तीन लोक की सम्पदा, सहज ही में गुरु देय |
Selected Quotes by Shivadin Ram Joshi (चुनिंदा उद्धरण)
वेद पुराण गुरु छवूँ शास्त्र, राम रामायण सत्य है नाता ।गीता का ज्ञान व ज्ञान गुरु, श्रुति न्याय व सूत्र गुरु समझाता ।चरन धूर निज सिर धरो, सरन गुरु की लेय,तीन लोक की सम्पदा, सहज ही में गुरु देय |अर्जुन दग्ध कियो वन खाण्डव,जाय यो काज तो तुच्छ सरायो ।मोहन खेल रहे है होरी ।गुवाल बाल संग रंग अनेकों, धन्य-धन्य यह होरी ।रिद्धी सिद्धी, गजानन्द के संग |प्रथम गणेश मनावें प्राणी, चढ़े भक्ति का रंग || रिद्धी....बरसत मिहरा आया श्रावन ।अमृत बरसा, बरसत रिमझिम, धरा हो गई पावन ।Videos on Shivadin Ram Joshi
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