About Pawan Karan
Pawan Karan (June 18, 1964) is an Indian poet, columnist, editor, social and political analyst and “one of the major poets of early 21st century”.He is highly regarded for his realistic depiction of women's life in Indian society. Apart that his poems written against subjects like imperialism, capitalism, religion fan…
Selected Quotes
Poetry & Stories
एक कट्टर हिन्दू फ़रमान
हमारे पास बचाने को कुछ नहीं थान हौसले, न हक़, न हथियार
राष्ट्रवाद
एक राष्ट्र के लिए राष्ट्रवाद से बुरा कुछ भी नहींउन्नीस सौ चौरासी को ही लें
धन संसद का प्रधानमन्त्री
धन-संसद का प्रधानमन्त्री सबसे ऊपर हैधन-संसद का ताक़तवर प्रधानमंत्री सरेआम
भारत के इतिहास में सोलह मई दो हजार चउदह
भारत के इतिहास में सोलह मई दो हजार चउदहएक ऐसा दिन बनकर आया जिसे देखने के लिए
अच्छे दिन आने वाले हैं
गुजरात की तर्ज पर सबको सबक सिखाने कीइच्छा रखने और पूरे देश को गुजरात बनाने का
About Pawan Karan
Pawan Karan: Quick Answers
Who is Pawan Karan?
Pawan Karan (June 18, 1964) is an Indian poet, columnist, editor, social and political analyst and “one of the major poets of early 21st century”. He is highly regarded for his realistic depiction of women's life in Indian society.
When was Pawan Karan born?
Pawan Karan was born on 18 June 1964. Associated place: Gwalior, Madhya Pradesh.
Where can I read Pawan Karan's poetry?
Kavishala has 10 poems and stories by Pawan Karan, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Pawan Karan
एक कट्टर हिन्दू फ़रमान
हमारे पास बचाने को कुछ नहीं थान हौसले, न हक़, न हथियार
राष्ट्रवाद
एक राष्ट्र के लिए राष्ट्रवाद से बुरा कुछ भी नहींउन्नीस सौ चौरासी को ही लें
धन संसद का प्रधानमन्त्री
धन-संसद का प्रधानमन्त्री सबसे ऊपर हैधन-संसद का ताक़तवर प्रधानमंत्री सरेआम
भारत के इतिहास में सोलह मई दो हजार चउदह
भारत के इतिहास में सोलह मई दो हजार चउदहएक ऐसा दिन बनकर आया जिसे देखने के लिए
अच्छे दिन आने वाले हैं
गुजरात की तर्ज पर सबको सबक सिखाने कीइच्छा रखने और पूरे देश को गुजरात बनाने का
गिलोटिन यन्त्र
यन्त्र होने से पहले वह धातु थाजैसे मकान होने से पहले वह लोहा होता है
किसान
इन दिनों उसके पास रहोउसे अपनी आंखों से दूर नहीं होने दो
इतिहास
इतिहास के शरीर सेपुराने उतारकर
थकान
थकान मेरे पैरों में घिसट रही हैमेरी ज़ुबान में लड़खड़ा रही है
चाहत
किसी और ने नहीं अपने धर्म को यह अधिकारमैंने ही दिया है कि वह जब चाहे
Selected Quotes by Pawan Karan (चुनिंदा उद्धरण)
एक राष्ट्र के लिए राष्ट्रवाद से बुरा कुछ भी नहींउन्नीस सौ चौरासी को ही लेंभारत के इतिहास में सोलह मई दो हजार चउदहएक ऐसा दिन बनकर आया जिसे देखने के लिएथकान मेरे पैरों में घिसट रही हैमेरी ज़ुबान में लड़खड़ा रही हैयन्त्र होने से पहले वह धातु थाजैसे मकान होने से पहले वह लोहा होता हैकिसी और ने नहीं अपने धर्म को यह अधिकारमैंने ही दिया है कि वह जब चाहेहमारे पास बचाने को कुछ नहीं थान हौसले, न हक़, न हथियारVideos on Pawan Karan
Loading videos…
Books by Pawan Karan
Loading books…








