About Majaz Lakhnawi
Asrar ul Haq Majaz Urdu: اسرارُالحق مجاز commonly known as Majaz Lakhnawi Urdu: مجاز لکھنَوی (19 October 1911 – 5 December 1955) was an Indian Urdu poet. He was known for his romantic and revolutionary poetry. He composed ghazals and nazms in Urdu. He was the maternal uncle of poet and screenplay writer Javed Akhta…
Selected Quotes
Poetry & Stories
शहर की रात
शहर की रात और मैं, नाशाद-ओ-नाकारा फिरूँजगमगाती जागती, सड़कों पे आवारा फिरूँ
तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ूँ न हुई
तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ूँ न हुई,वो सई-ए-करम फ़रमा भी गए।
वो एक नर्स थी चारागर जिसको कहिए
वो एक नर्स थी चारागर जिसको कहिएमदावाये दर्दे जिगर जिसको कहिए
इश्क का जौके-नजारा
(1)इश्क का जौके-नजारा1 मुफ्त को बदनाम है,
जिगर और दिल को बचाना भी है
जिगर और दिल को बचाना भी हैनज़र आप ही से मिलाना भी है
About Majaz Lakhnawi
Majaz Lakhnawi: Quick Answers
Who is Majaz Lakhnawi?
Asrar ul Haq Majaz Urdu: اسرارُالحق مجاز commonly known as Majaz Lakhnawi Urdu: مجاز لکھنَوی (19 October 1911 – 5 December 1955) was an Indian Urdu poet. He was known for his romantic and revolutionary poetry.
When was Majaz Lakhnawi born?
Majaz Lakhnawi was born on 19 October 1911.
When did Majaz Lakhnawi die?
Majaz Lakhnawi passed away on 5 December 1955.
Where can I read Majaz Lakhnawi's poetry?
Kavishala has 20 poems and stories by Majaz Lakhnawi, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Majaz Lakhnawi
शहर की रात
शहर की रात और मैं, नाशाद-ओ-नाकारा फिरूँजगमगाती जागती, सड़कों पे आवारा फिरूँ
तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ूँ न हुई
तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ूँ न हुई,वो सई-ए-करम फ़रमा भी गए।
वो एक नर्स थी चारागर जिसको कहिए
वो एक नर्स थी चारागर जिसको कहिएमदावाये दर्दे जिगर जिसको कहिए
इश्क का जौके-नजारा
(1)इश्क का जौके-नजारा1 मुफ्त को बदनाम है,
जिगर और दिल को बचाना भी है
जिगर और दिल को बचाना भी हैनज़र आप ही से मिलाना भी है
कुछ तुझ को है ख़बर
कुछ तुझ को है ख़बर हम क्या क्या ऐ शोरिश-ए-दौराँ भूल गएवह ज़ुल्फ़-ए-परीशाँ भूल गए, वह दीद-ए-गिरयाँ भूल गए
अपने दिल को दोनों आलम से उठा सकता हूँ मैं
अपने दिल को दोनों आलम से उठा सकता हूँ मैंक्या समझती हो कि तुमको भी भुला सकता हूँ मैं
बर्बाद-ए-तमन्ना पे अताब और ज्यादा
बर्बाद-ए-तमन्ना पे अताब और ज्यादाहाँ मेरी मोहब्बत का जवाब और ज्यादा
अब मेरे पास तुम आई हो तो क्या आई हो?
अब मेरे पास तुम आई हो तो क्या आई हो?मैने माना के तुम इक पैकर-ए-रानाई हो
निगाह-ए-लुत्फ़ मत उठा खूगर-ए-आलाम रहने दे
निगाह-ए-लुत्फ़ मत उठा खूगर-ए-आलाम रहने देहमें नाकाम रहना है हमें नाकाम रहने दे
इक नन्ही पुजारन,
इक नन्ही मुन्नी सी पुजारन, पतली बाहें, पतली गर्दन।भोर भये मन्दिर आयी है, आई नहीं है माँ लायी है।
सर शार-ए-निगाह-ऐ-नरिगस हूँ
सर शार-ए-निगाह-ऐ-नरिगस हूँ, पाबस्ता-ए-गेसू-ऐ सुंबुल हूँ।ये मेरा चमन है मेरा चमन, मैं अपने चमन का बुलबुल हूँ।
Selected Quotes by Majaz Lakhnawi (चुनिंदा उद्धरण)
अब मेरे पास तुम आई हो तो क्या आई हो?मैने माना के तुम इक पैकर-ए-रानाई होवो एक नर्स थी चारागर जिसको कहिएमदावाये दर्दे जिगर जिसको कहिएशहर की रात और मैं, नाशाद-ओ-नाकारा फिरूँजगमगाती जागती, सड़कों पे आवारा फिरूँसर शार-ए-निगाह-ऐ-नरिगस हूँ, पाबस्ता-ए-गेसू-ऐ सुंबुल हूँ।ये मेरा चमन है मेरा चमन, मैं अपने चमन का बुलबुल हूँ।अपने दिल को दोनों आलम से उठा सकता हूँ मैंक्या समझती हो कि तुमको भी भुला सकता हूँ मैंतस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ूँ न हुई,वो सई-ए-करम फ़रमा भी गए।Videos on Majaz Lakhnawi
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