About Kunwar Bechain
Dr. Kunwar Bechain is a Hindi poet of India. He is a resident of Ghaziabad, Uttar Pradesh. Dr. Bechain was born in village Umri, District Moradabad, Uttar Pradesh on 1 July 1942. His actual name is Dr. Kunwar Bahadur Saxena. He worked as head of the Hindi department in MMH College, Ghaziabad.
Selected Quotes
Poetry & Stories
कोरोना वायरस से बचने के लिए | तीन कुंडलियाँ
कोरोना का वायरस, ऐसा फैला यारकुछ ही दिन में आ गया, ख़तरे में संसार
हाइकु - कुँअर बेचैन
जल चढ़ायातो सूर्य ने लौटाए
कानाबाती कुर्र - कुँअर बेचैन
अरी चिरइया नींद की,हो जा जल्दी फुर्र!
लौट आ रे - कुँअर बेचैन
लौट आ रे !ओ प्रवासी जल !
प्यासे होंठों से - कुँअर बेचैन
प्यासे होंठों से जब कोई झील न बोली बाबू जीहमने अपने ही आँसू से आँख भिगो ली बाबू जी
About Kunwar Bechain
Kunwar Bechain: Quick Answers
Who is Kunwar Bechain?
Dr. Kunwar Bechain is a Hindi poet of India.
When was Kunwar Bechain born?
Kunwar Bechain was born on 1 July 1942. Associated place: Ghaziabad, UP.
Where can I read Kunwar Bechain's poetry?
Kavishala has 13 poems and stories by Kunwar Bechain, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Kunwar Bechain
कोरोना वायरस से बचने के लिए | तीन कुंडलियाँ
कोरोना का वायरस, ऐसा फैला यारकुछ ही दिन में आ गया, ख़तरे में संसार
हाइकु - कुँअर बेचैन
जल चढ़ायातो सूर्य ने लौटाए
कानाबाती कुर्र - कुँअर बेचैन
अरी चिरइया नींद की,हो जा जल्दी फुर्र!
लौट आ रे - कुँअर बेचैन
लौट आ रे !ओ प्रवासी जल !
प्यासे होंठों से - कुँअर बेचैन
प्यासे होंठों से जब कोई झील न बोली बाबू जीहमने अपने ही आँसू से आँख भिगो ली बाबू जी
जिस मृग पर कस्तूरी है - कुँअर बेचैन
मिलना और बिछुड़ना दोनोंजीवन की मजबूरी है।
सोख न लेना पानी - कुँअर बेचैन
सूरज !सोख न लेना पानी !
दो दिलों के दरमियाँ - कुँअर बेचैन
दो दिलों के दरमियाँ दीवार-सा अंतर न फेंकचहचहाती बुलबुलों पर विषबुझे खंजर न फेंक
वर्ना रो पड़ोगे ! - कुँअर बेचैन
बंद होंठों में छुपा लोये हँसी के फूल
चल हवा - कुँअर बेचैन
चल हवा, उस ओर मेरे साथ चलचल वहाँ तक जिस जगह मेरी प्रिया
दो चार बार हम जो कभी - कुँअर बेचैन
दो चार बार हम जो कभी हँस-हँसा लिएसारे जहाँ ने हाथ में पत्थर उठा लिए
उँगलियाँ थाम के खुद - कुँअर बेचैन
उँगलियाँ थाम के खुद चलना सिखाया था जिसेराह में छोड़ गया राह पे लाया था जिसे
Selected Quotes by Kunwar Bechain (चुनिंदा उद्धरण)
कोरोना का वायरस, ऐसा फैला यारकुछ ही दिन में आ गया, ख़तरे में संसारदो चार बार हम जो कभी हँस-हँसा लिएसारे जहाँ ने हाथ में पत्थर उठा लिएप्यासे होंठों से जब कोई झील न बोली बाबू जीहमने अपने ही आँसू से आँख भिगो ली बाबू जीमिलना और बिछुड़ना दोनोंजीवन की मजबूरी है।चल हवा, उस ओर मेरे साथ चलचल वहाँ तक जिस जगह मेरी प्रियाजल चढ़ायातो सूर्य ने लौटाएVideos on Kunwar Bechain
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