About Wasim Barelvi
Zahid Hussain (born 8 February 1940), better known by the pen name Wasim Barelvi, is an eminent Indian Urdu language poet. He was born in Bareilly, Uttar Pradesh. His ghazals, many sung by Jagjit Singh, are very popular. He has been awarded with the "Firaq Gorakhpuri International Award", the Kalidas gold medal (by th…
Selected Quotes
Poetry & Stories
मुहब्बतों के दिनों की यही ख़राबी है
तुम्हारी राह में मिट्टी के घर नहीं आतेइसीलिए तो तुम्हें हम नज़र नहीं आते
उसूलों पे जहाँ आँच आये टकराना ज़रूरी है
उसूलों पे जहाँ आँच आये टकराना ज़रूरी हैजो ज़िन्दा हों तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है
उड़ान वालो उड़ानों पे वक़्त भारी है
उड़ान वालो उड़ानों पे वक़्त भारी हैपरों की अब के नहीं हौसलों की बारी है
कितना दुश्वार है दुनिया ये हुनर आना भी
कितना दुश्वार है दुनिया ये हुनर आना भीतुझी से फ़ासला रखना तुझे अपनाना भी
अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपायें कैसे
अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपायें कैसेतेरी मर्ज़ी के मुताबिक नज़र आयें कैसे
About Wasim Barelvi
Wasim Barelvi: Quick Answers
Who is Wasim Barelvi?
Zahid Hussain (born 8 February 1940), better known by the pen name Wasim Barelvi, is an eminent Indian Urdu language poet. He was born in Bareilly, Uttar Pradesh.
When was Wasim Barelvi born?
Wasim Barelvi was born on 8 February 1940.
Where can I read Wasim Barelvi's poetry?
Kavishala has 22 poems and stories by Wasim Barelvi, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Wasim Barelvi
मुहब्बतों के दिनों की यही ख़राबी है
तुम्हारी राह में मिट्टी के घर नहीं आतेइसीलिए तो तुम्हें हम नज़र नहीं आते
उसूलों पे जहाँ आँच आये टकराना ज़रूरी है
उसूलों पे जहाँ आँच आये टकराना ज़रूरी हैजो ज़िन्दा हों तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है
उड़ान वालो उड़ानों पे वक़्त भारी है
उड़ान वालो उड़ानों पे वक़्त भारी हैपरों की अब के नहीं हौसलों की बारी है
कितना दुश्वार है दुनिया ये हुनर आना भी
कितना दुश्वार है दुनिया ये हुनर आना भीतुझी से फ़ासला रखना तुझे अपनाना भी
अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपायें कैसे
अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपायें कैसेतेरी मर्ज़ी के मुताबिक नज़र आयें कैसे
लहू न हो तो क़लम तरजुमाँ नहीं होता
लहू न हो तो क़लम तरजुमाँ नहीं होताहमारे दौर में आँसू ज़ुबाँ नहीं होता
आपको देख कर देखता रह गया
आपको देख कर देखता रह गयाक्या कहूँ और कहने को क्या रह गया
जरा सा क़तरा कहीं आज अगर उभरता है
जरा सा क़तरा कहीं आज अगर उभरता है,समंदरो ही के लहजे में बात करता है।
मिली हवाओं में उड़ने की वो सज़ा यारो
मिली हवाओं में उड़ने की वो सज़ा यारोके मैं ज़मीन के रिश्तों से कट गया यारो
मैं चाहता भी यही था वो बेवफ़ा निकले
मैं चाहता भी यही था वो बेवफ़ा निकलेउसे समझने का कोई तो सिलसिला निकले
मैं इस उम्मीद पे डूबा के तू बचा लेगा
मैं इस उम्मीद पे डूबा के तू बचा लेगाअब इसके बाद मेरा इम्तेहान क्या लेगा
उसको छोटा कह के मैं कैसे बड़ा हो जाऊँगा
अपने हर इक लफ़्ज़ का ख़ुद आईना हो जाऊँगाउसको छोटा कह के मैं कैसे बड़ा हो जाऊँगा
Selected Quotes by Wasim Barelvi (चुनिंदा उद्धरण)
उसूलों पे जहाँ आँच आये टकराना ज़रूरी हैजो ज़िन्दा हों तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी हैअपने हर इक लफ़्ज़ का ख़ुद आईना हो जाऊँगाउसको छोटा कह के मैं कैसे बड़ा हो जाऊँगामैं चाहता भी यही था वो बेवफ़ा निकलेउसे समझने का कोई तो सिलसिला निकलेतुम्हारी राह में मिट्टी के घर नहीं आतेइसीलिए तो तुम्हें हम नज़र नहीं आतेमिली हवाओं में उड़ने की वो सज़ा यारोके मैं ज़मीन के रिश्तों से कट गया यारोउड़ान वालो उड़ानों पे वक़्त भारी हैपरों की अब के नहीं हौसलों की बारी हैVideos on Wasim Barelvi
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