About Krishnadas
Krishnadas (1495-1581) Is one of the Ashtachap poets, after Surdas and Nandadas he is considered to be excellent. He was born in a Kunbi (Patel) family in Tilotra village of Rajnagar (Ahmedabad) in Gujarat. Impressed by his intelligence and efficiency, Vallabhacharya initiated him and made him an officer of the temple…
Selected Quotes
Poetry & Stories
बैद को बैद गुनी को गुनी
बैद को बैद गुनी को गुनी ठग को ठग ढूमक को मन भावै ।काग को काग मराल मराल को कान्ध गधा को खजुलावै ।
मो मन गिरिधर छबि पै अटक्यो
मो मन गिरिधर छबि पै अटक्यो।ललित त्रिभंग चाल पै चलि कै, चिबुक चारु गडि ठठक्यो॥
देख जिऊँ माई नयन रँगीलो
देख जिऊँ माई नयन रँगीलो।लै चल सखी री तेरे पायन लागौं, गोबर्धन धर छैल छबीलो॥
तरनि तनया तट आवत है प्रात
तरनि तनया तट आवत है प्रात समय,कंदुक खेलत देख्यो आनंद को कंदवा.
कंचन मनि मरकत रस ओपी
कंचन मनि मरकत रस ओपी।नन्द सुवन के संगम सुखकर अधिक विराजति गोपी।।
About Krishnadas
Krishnadas: Quick Answers
Who is Krishnadas?
Krishnadas (1495-1581) Is one of the Ashtachap poets, after Surdas and Nandadas he is considered to be excellent. He was born in a Kunbi (Patel) family in Tilotra village of Rajnagar (Ahmedabad) in Gujarat.
When was Krishnadas born?
Krishnadas was born on 1 January 1495.
When did Krishnadas die?
Krishnadas passed away on 1 January 1581.
Where can I read Krishnadas's poetry?
Kavishala has 19 poems and stories by Krishnadas, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Krishnadas
बैद को बैद गुनी को गुनी
बैद को बैद गुनी को गुनी ठग को ठग ढूमक को मन भावै ।काग को काग मराल मराल को कान्ध गधा को खजुलावै ।
मो मन गिरिधर छबि पै अटक्यो
मो मन गिरिधर छबि पै अटक्यो।ललित त्रिभंग चाल पै चलि कै, चिबुक चारु गडि ठठक्यो॥
देख जिऊँ माई नयन रँगीलो
देख जिऊँ माई नयन रँगीलो।लै चल सखी री तेरे पायन लागौं, गोबर्धन धर छैल छबीलो॥
तरनि तनया तट आवत है प्रात
तरनि तनया तट आवत है प्रात समय,कंदुक खेलत देख्यो आनंद को कंदवा.
कंचन मनि मरकत रस ओपी
कंचन मनि मरकत रस ओपी।नन्द सुवन के संगम सुखकर अधिक विराजति गोपी।।
प्रातकाल प्यारेलाल आवनी बनी
प्रातकाल प्यारेलाल आवनी बनी॥उर सोहे मरगजी सुमाल डगमगी सुदेशचाल चरणकंज मगनजीति करत गामिनी ॥१॥
गोकुल गाम सुहावनो
गोकुल गाम सुहावनो सब मिलि खेलें फाग। मोहन मुरली बजावैं गावें गोरी राग ॥१॥नर नारी एकत्र व्है आये नंद दरबार। साजे झालर किन्नरी आवज डफ कठतार ॥२॥
सघन कुंज भवन
सघन कुंज भवन आज फूलन की मंडली रचि ता मधि लै संग राधा बैठे गिरिधरनलाल।चूनरी की बांधि पाग अंग बागो चूनरी को उपरेना कंठ हीरा हार मोती माल॥१॥
नंद घरुनि वृषभान
नंद घरुनि वृषभान घरुनि मिलि कहति सबन गनगौर मनाओ।नये बसन आभूषन पहरो मंगल गीत मनोहर गाओ॥१॥
रंगीली तीज गनगौर
रंगीली तीज गनगौर आज चलो भामिनी कुंज छाक लै जैये।विविध भांति नई सोंज अरपि सब अपने जिय की तृपत बुझैये॥१॥
नवल निकुंज महेल मंदिर
नवल निकुंज महेल मंदिर में जेंवन बैठे कुंवर कन्हाई।भरि भरि डला सीस धरि अपने व्रजबधू तहाँ छाक लै आई॥१॥
कहत जसोदा सब सखियन
कहत जसोदा सब सखियन सों आवो बैठो मंगल गावो।है गनगौर की तीज रंगीली कान्ह कुंवर को लाड लडावो॥१॥
Selected Quotes by Krishnadas (चुनिंदा उद्धरण)
मो मन गिरिधर छबि पै अटक्यो।ललित त्रिभंग चाल पै चलि कै, चिबुक चारु गडि ठठक्यो॥बैद को बैद गुनी को गुनी ठग को ठग ढूमक को मन भावै ।काग को काग मराल मराल को कान्ध गधा को खजुलावै ।तरनि तनया तट आवत है प्रात समय,कंदुक खेलत देख्यो आनंद को कंदवा.कंचन मनि मरकत रस ओपी।नन्द सुवन के संगम सुखकर अधिक विराजति गोपी।।सघन कुंज भवन आज फूलन की मंडली रचि ता मधि लै संग राधा बैठे गिरिधरनलाल।चूनरी की बांधि पाग अंग बागो चूनरी को उपरेना कंठ हीरा हार मोती माल॥१॥नंद घरुनि वृषभान घरुनि मिलि कहति सबन गनगौर मनाओ।नये बसन आभूषन पहरो मंगल गीत मनोहर गाओ॥१॥Videos on Krishnadas
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