About Javed Akhtar
Javed Akhtar (born 17 January 1945) is an Indian political activist, poet, lyricist and screenwriter, originally from Gwalior area. He is a recipient of the Padma Shri (1999), Padma Bhushan (2007), the Sahitya Akademi Award as well as five National Film Awards. In early part of his career he was a screenplay writer, c…
Selected Quotes
Poetry & Stories
साज़िश
मुझे तो ये लगता है जैसे किसी ने यह साज़िश रची हैके लफ़्ज़ और माने में जो रिश्ता है
जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता
जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगतामुझे पामाल रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता
याद उसे भी एक अधूरा अफ़्साना तो होगा
याद उसे भी एक अधूरा अफ़्साना तो होगाकल रस्ते में उस ने हम को पहचाना तो होगा
जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो
जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लोलोग लगते हैं परेशान ज़रा देख तो लो
बहाना ढूँडते रहते हैं कोई रोने का
बहाना ढूँडते रहते हैं कोई रोने काहमें ये शौक़ है क्या आस्तीं भिगोने का
About Javed Akhtar
Javed Akhtar: Quick Answers
Who is Javed Akhtar?
Javed Akhtar (born 17 January 1945) is an Indian political activist, poet, lyricist and screenwriter, originally from Gwalior area. He is a recipient of the Padma Shri (1999), Padma Bhushan (2007), the Sahitya Akademi Award as well as five National Film Awards.
When was Javed Akhtar born?
Javed Akhtar was born on 17 January 1945. Associated place: Gwalior, India.
Where can I read Javed Akhtar's poetry?
Kavishala has 25 poems and stories by Javed Akhtar, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Javed Akhtar
साज़िश
मुझे तो ये लगता है जैसे किसी ने यह साज़िश रची हैके लफ़्ज़ और माने में जो रिश्ता है
जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता
जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगतामुझे पामाल रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता
याद उसे भी एक अधूरा अफ़्साना तो होगा
याद उसे भी एक अधूरा अफ़्साना तो होगाकल रस्ते में उस ने हम को पहचाना तो होगा
जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो
जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लोलोग लगते हैं परेशान ज़रा देख तो लो
बहाना ढूँडते रहते हैं कोई रोने का
बहाना ढूँडते रहते हैं कोई रोने काहमें ये शौक़ है क्या आस्तीं भिगोने का
मुझ को यक़ीं है सच कहती थीं जो भी अम्मी कहती थीं
मुझ को यक़ीं है सच कहती थीं जो भी अम्मी कहती थींजब मेरे बचपन के दिन थे चाँद में परियाँ रहती थीं
कभी कभी मैं ये सोचता हूँ कि मुझ को तेरी तलाश क्यूँ है
कभी कभी मैं ये सोचता हूँ कि मुझ को तेरी तलाश क्यूँ हैकि जब हैं सारे ही तार टूटे तो साज़ में इर्तिआ'श क्यूँ है
अभी ज़मीर में थोड़ी सी जान बाक़ी है
अभी ज़मीर में थोड़ी सी जान बाक़ी हैअभी हमारा कोई इम्तिहान बाक़ी है
ये खेल क्या है
मिरे मुख़ालिफ़ ने चाल चल दी हैऔर अब
वक़्त
ये वक़्त क्या हैये क्या है आख़िर कि जो मुसलसल गुज़र रहा है
दुश्वारी
मैं भूल जाऊँ तुम्हेंअब यही मुनासिब है
बंजारा
मैं बंजारावक़्त के कितने शहरों से गुज़रा हूँ
Selected Quotes by Javed Akhtar (चुनिंदा उद्धरण)
मुझे तो ये लगता है जैसे किसी ने यह साज़िश रची हैके लफ़्ज़ और माने में जो रिश्ता हैमैं बंजारावक़्त के कितने शहरों से गुज़रा हूँये वक़्त क्या हैये क्या है आख़िर कि जो मुसलसल गुज़र रहा हैमैं भूल जाऊँ तुम्हेंअब यही मुनासिब हैजीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लोलोग लगते हैं परेशान ज़रा देख तो लोजिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगतामुझे पामाल रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगताVideos on Javed Akhtar
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