Bihari Lal, poet
Sootradhar · Author

Bihari Lal

1 January 1595Gwalior

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About Bihari Lal

Bihari Lal Chaube or Bihārī (1595–1663) was a Hindi poet, who is famous for writing the Satasaī (Seven Hundred Verses) in Brajbhasha, a collection of approximately seven hundred distichs, Kumar which is perhaps the most celebrated Hindi work of poetic art, as distinguished from narrative and simpler styles. Today it i…

Selected Quotes

माहि सरोवर सौरभ लै, ततकाल खिले जलजातन मैं कैनीठि चलै जल वास अचै, लपटाइ लता तरु मारग मैं कै
— Bihari Lal
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है यह आजु बसन्त समौ, सु भरौसो न काहुहि कान्ह के जी कौअंध कै गंध बढ़ाय लै जात है, मंजुल मारुत कुंज गली कौ
— Bihari Lal
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Poetry & Stories

  1. माहि सरोवर

    माहि सरोवर सौरभ लै, ततकाल खिले जलजातन मैं कैनीठि चलै जल वास अचै, लपटाइ लता तरु मारग मैं कै

    1 min read · 13.4K reads
  2. है यह आजु बसन्त समौ

    है यह आजु बसन्त समौ, सु भरौसो न काहुहि कान्ह के जी कौअंध कै गंध बढ़ाय लै जात है, मंजुल मारुत कुंज गली कौ

    1 min read · 13.2K reads
  3. बौरसरी मधुपान छक्यौ

    बौरसरी मधुपान छक्यौ, मकरन्द भरे अरविन्द जु न्हायौमाधुरी कुंज सौं खाइ धका, परि केतकि पाँडर कै उठि धायौ

    1 min read · 12.7K reads
  4. जाके लिए घर आई

    जाके लिए घर आई घिघाय, करी मनुहारि उती तुम गाढ़ीआजु लखैं उहिं जात उतै, न रही सुरत्यौ उर यौं रति बाढ़ी

    1 min read · 12.9K reads
  5. खेलत फाग दुहूँ तिय कौ

    खेलत फाग दुहूँ तिय कौ मन राखिबै कौ कियौ दाँव नवीनौप्यार जनाय घरैंनु सौं लै, भरि मूँठि गुलाल दुहूँ दृग दीनौ

    1 min read · 12.7K reads

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