About Bihari Lal
Bihari Lal Chaube or Bihārī (1595–1663) was a Hindi poet, who is famous for writing the Satasaī (Seven Hundred Verses) in Brajbhasha, a collection of approximately seven hundred distichs, Kumar which is perhaps the most celebrated Hindi work of poetic art, as distinguished from narrative and simpler styles. Today it i…
Selected Quotes
Poetry & Stories
माहि सरोवर
माहि सरोवर सौरभ लै, ततकाल खिले जलजातन मैं कैनीठि चलै जल वास अचै, लपटाइ लता तरु मारग मैं कै
है यह आजु बसन्त समौ
है यह आजु बसन्त समौ, सु भरौसो न काहुहि कान्ह के जी कौअंध कै गंध बढ़ाय लै जात है, मंजुल मारुत कुंज गली कौ
बौरसरी मधुपान छक्यौ
बौरसरी मधुपान छक्यौ, मकरन्द भरे अरविन्द जु न्हायौमाधुरी कुंज सौं खाइ धका, परि केतकि पाँडर कै उठि धायौ
जाके लिए घर आई
जाके लिए घर आई घिघाय, करी मनुहारि उती तुम गाढ़ीआजु लखैं उहिं जात उतै, न रही सुरत्यौ उर यौं रति बाढ़ी
खेलत फाग दुहूँ तिय कौ
खेलत फाग दुहूँ तिय कौ मन राखिबै कौ कियौ दाँव नवीनौप्यार जनाय घरैंनु सौं लै, भरि मूँठि गुलाल दुहूँ दृग दीनौ
About Bihari Lal
Bihari Lal: Quick Answers
Who is Bihari Lal?
Bihari Lal Chaube or Bihārī (1595–1663) was a Hindi poet, who is famous for writing the Satasaī (Seven Hundred Verses) in Brajbhasha, a collection of approximately seven hundred distichs, Kumar which is perhaps the most celebrated Hindi work of poetic art, as distinguished from narrative and simpler styles. Today it i…
When was Bihari Lal born?
Bihari Lal was born on 1 January 1595. Associated place: Gwalior.
Where can I read Bihari Lal's poetry?
Kavishala has 16 poems and stories by Bihari Lal, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Bihari Lal
माहि सरोवर
माहि सरोवर सौरभ लै, ततकाल खिले जलजातन मैं कैनीठि चलै जल वास अचै, लपटाइ लता तरु मारग मैं कै
है यह आजु बसन्त समौ
है यह आजु बसन्त समौ, सु भरौसो न काहुहि कान्ह के जी कौअंध कै गंध बढ़ाय लै जात है, मंजुल मारुत कुंज गली कौ
बौरसरी मधुपान छक्यौ
बौरसरी मधुपान छक्यौ, मकरन्द भरे अरविन्द जु न्हायौमाधुरी कुंज सौं खाइ धका, परि केतकि पाँडर कै उठि धायौ
जाके लिए घर आई
जाके लिए घर आई घिघाय, करी मनुहारि उती तुम गाढ़ीआजु लखैं उहिं जात उतै, न रही सुरत्यौ उर यौं रति बाढ़ी
खेलत फाग दुहूँ तिय कौ
खेलत फाग दुहूँ तिय कौ मन राखिबै कौ कियौ दाँव नवीनौप्यार जनाय घरैंनु सौं लै, भरि मूँठि गुलाल दुहूँ दृग दीनौ
नील पर कटि तट जटनि दै मेरी आली
नील पर कटि तट जटनि दै मेरी आली,लटुन सी साँवरी रजनि सरसान दै,
जानत नहिं लगि मैं मानिहौं
जानत नहिं लगि मैं मानिहौं बिलगि कहैतुम तौ बधात ही तै वहै नाँध नाध्यौ है।
वंस बड़ौ बड़ी संगति पाइ
वंस बड़ौ बड़ी संगति पाइ, बड़ाई बड़ी खरी यौ जग झेली।साँप फुकारन सीस रसारनु है सबसे जिय ऊपर खेली।
गाहि
गाहि सरोवर सौरभ लै, ततकाल खिले जलजातन मैं कै।नीठि चलै जल वास अचै, लपटाइ लता तरु मारग मैं कै।
बिरहानल दाह दहै तन ताप
बिरहानल दाह दहै तन ताप, करी बड़वानल ज्वाल रदी।घर तैं लखि चन्द्रमुखीन चली, चलि माह अन्हान कछू जु सदी।
पावस रितु बृन्दावनकी दुति दिन-दिन
पावस रितु बृन्दावनकी दुति दिन-दिन दूनी दरसै है।छबि सरसै है लूमझूम यो सावन घन घन बरसै है॥१॥
सौंह कियें ढरकौहे से नैन
सौंह कियें ढरकौहे से नैन, टकी न टटै हिलकी हलियै।मुँह आगै हू आये न सूझयौ कछू ,सु कहयौ कछु ये सुति साँभल ए।
Selected Quotes by Bihari Lal (चुनिंदा उद्धरण)
माहि सरोवर सौरभ लै, ततकाल खिले जलजातन मैं कैनीठि चलै जल वास अचै, लपटाइ लता तरु मारग मैं कैहै यह आजु बसन्त समौ, सु भरौसो न काहुहि कान्ह के जी कौअंध कै गंध बढ़ाय लै जात है, मंजुल मारुत कुंज गली कौजाके लिए घर आई घिघाय, करी मनुहारि उती तुम गाढ़ीआजु लखैं उहिं जात उतै, न रही सुरत्यौ उर यौं रति बाढ़ीपावस रितु बृन्दावनकी दुति दिन-दिन दूनी दरसै है।छबि सरसै है लूमझूम यो सावन घन घन बरसै है॥१॥जानत नहिं लगि मैं मानिहौं बिलगि कहैतुम तौ बधात ही तै वहै नाँध नाध्यौ है।बिरहानल दाह दहै तन ताप, करी बड़वानल ज्वाल रदी।घर तैं लखि चन्द्रमुखीन चली, चलि माह अन्हान कछू जु सदी।Videos on Bihari Lal
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