About Bashir Badr
Bashir Badr is an Indian poet of Urdu. Badr was born in Faizabad, India. He is an alumnus of Aligarh Muslim University. He is married and has three sons Nusrat Badr, Masum Badr, Taiyeb Badr and a daughter Saba Badr. He lived in the Aligarh university area during student time and teaching time. He also lived in Meerut,…
Selected Quotes
Poetry & Stories
बशीर बद्र की शायरी
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दोन जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
कभी यूँ मिलें कोई मसलेहत, कोई ख़ौफ़ दिल में ज़रा न हो - बशीर बद्र
कभी यूँ मिलें कोई मसलेहत, कोई ख़ौफ़ दिल में ज़रा न होमुझे अपनी कोई ख़बर न हो, तुझे अपना कोई पता न हो
वो चांदनी का बदन ख़ुशबूओं का साया है - बशीर बद्र
वो चांदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया हैबहुत अज़ीज़ हमें है मगर पराया है
सर से चादर बदन से क़बा ले गई - बशीर बद्र
सर से चादर बदन से क़बा ले गईज़िन्दगी हम फ़क़ीरों से क्या ले गई
मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती ना मिला - बशीर बद्र
मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती ना मिलाअगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी ना मिला
About Bashir Badr
Bashir Badr: Quick Answers
Who is Bashir Badr?
Bashir Badr is an Indian poet of Urdu. Badr was born in Faizabad, India.
When was Bashir Badr born?
Bashir Badr was born on 15 February 1935. Associated place: Faizabad.
Where can I read Bashir Badr's poetry?
Kavishala has 27 poems and stories by Bashir Badr, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Bashir Badr
बशीर बद्र की शायरी
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दोन जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
कभी यूँ मिलें कोई मसलेहत, कोई ख़ौफ़ दिल में ज़रा न हो - बशीर बद्र
कभी यूँ मिलें कोई मसलेहत, कोई ख़ौफ़ दिल में ज़रा न होमुझे अपनी कोई ख़बर न हो, तुझे अपना कोई पता न हो
वो चांदनी का बदन ख़ुशबूओं का साया है - बशीर बद्र
वो चांदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया हैबहुत अज़ीज़ हमें है मगर पराया है
सर से चादर बदन से क़बा ले गई - बशीर बद्र
सर से चादर बदन से क़बा ले गईज़िन्दगी हम फ़क़ीरों से क्या ले गई
मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती ना मिला - बशीर बद्र
मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती ना मिलाअगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी ना मिला
वो थका हुआ मेरी बाहों में ज़रा - बशीर बद्र
वो थका हुआ मेरी बाहों में ज़रा सो गया था तो क्या हुआअभी मैं ने देखा है चाँद भी किसी शाख़-ए-गुल पे झुका हुआ
सुबह का झरना - बशीर बद्र
सुबह का झरना, हमेशा हंसने वाली औरतेंझूटपुटे की नदियां, ख़मोश गहरी औरतें
हमारा दिल - बशीर बद्र
हमारा दिल सवेरे का सुनहरा जाम हो जाएचराग़ों की तरह आँखें जलें, जब शाम हो जाए
आ चांदनी भी मेरी तरह जाग रही है - बशीर बद्र
आ चाँदनी भी मेरी तरह जाग रही हैपलकों पे सितारों को लिये रात खड़ी है
आँसुओं की जहाँ पायमाली रही - बशीर बद्र
आँसुओं की जहाँ पायमाली रहीऐसी बस्ती चराग़ों से ख़ाली रही
आस होगी न आसरा होगा - बशीर बद्र
आस होगी न आसरा होगाआने वाले दिनों में क्या होगा
अभी इस तरफ़ न निगाह कर - बशीर बद्र
अभी इस तरफ़ न निगाह कर मैं ग़ज़ल की पलकें सँवार लूँमेरा लफ़्ज़-लफ़्ज़ हो आईना तुझे आईने में उतार लूँ
Selected Quotes by Bashir Badr (चुनिंदा उद्धरण)
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दोन जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाएकभी यूँ मिलें कोई मसलेहत, कोई ख़ौफ़ दिल में ज़रा न होमुझे अपनी कोई ख़बर न हो, तुझे अपना कोई पता न होमोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती ना मिलाअगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी ना मिलावो थका हुआ मेरी बाहों में ज़रा सो गया था तो क्या हुआअभी मैं ने देखा है चाँद भी किसी शाख़-ए-गुल पे झुका हुआवो चांदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया हैबहुत अज़ीज़ हमें है मगर पराया हैसर से चादर बदन से क़बा ले गईज़िन्दगी हम फ़क़ीरों से क्या ले गईVideos on Bashir Badr
Loading videos…
Books by Bashir Badr
Loading books…








