About Muhammad Iqbal
Sir Allama Muhammad Iqbal, known as Allama Iqbal, was a poet, philosopher, theorist, and barrister in British India. He has been called the "Spiritual Father of Pakistan" for his contributions to the nation. Iqbal's poems, political contributions, and academic and scholarly research were distinguished.
Selected Quotes
Poetry & Stories
सितारों से आगे
सितारों से आगे जहाँ और भी हैंअभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं
तिरे इश्क़ की इंतिहा
तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँमिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ
कभी ऐ हक़ीक़त
कभी ऐ हक़ीक़त-ए-मुंतज़र नज़र आ लिबास-ए-मजाज़ मेंकि हज़ारों सज्दे तड़प रहे हैं मिरी जबीन-ए-नियाज़ में
ख़िर्द-मंदों से क्या पूछूँ
ख़िर्द-मंदों से क्या पूछूँ कि मेरी इब्तिदा क्या हैकि मैं इस फ़िक्र में रहता हूँ मेरी इंतिहा क्या है
गेसू-ए-ताबदार
गेसू-ए-ताबदार को और भी ताबदार करहोश ओ ख़िरद शिकार कर क़ल्ब ओ नज़र शिकार कर
About Muhammad Iqbal
Muhammad Iqbal: Quick Answers
Who is Muhammad Iqbal?
Sir Allama Muhammad Iqbal, known as Allama Iqbal, was a poet, philosopher, theorist, and barrister in British India. He has been called the "Spiritual Father of Pakistan" for his contributions to the nation.
When was Muhammad Iqbal born?
Muhammad Iqbal was born on 9 November 1877. Associated place: Sialkot, Pakistan.
When did Muhammad Iqbal die?
Muhammad Iqbal passed away on 21 April 1938.
Where can I read Muhammad Iqbal's poetry?
Kavishala has 106 poems and stories by Muhammad Iqbal, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Muhammad Iqbal
सितारों से आगे
सितारों से आगे जहाँ और भी हैंअभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं
तिरे इश्क़ की इंतिहा
तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँमिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ
कभी ऐ हक़ीक़त
कभी ऐ हक़ीक़त-ए-मुंतज़र नज़र आ लिबास-ए-मजाज़ मेंकि हज़ारों सज्दे तड़प रहे हैं मिरी जबीन-ए-नियाज़ में
ख़िर्द-मंदों से क्या पूछूँ
ख़िर्द-मंदों से क्या पूछूँ कि मेरी इब्तिदा क्या हैकि मैं इस फ़िक्र में रहता हूँ मेरी इंतिहा क्या है
गेसू-ए-ताबदार
गेसू-ए-ताबदार को और भी ताबदार करहोश ओ ख़िरद शिकार कर क़ल्ब ओ नज़र शिकार कर
मजनूँ ने शहर छोड़ा
मजनूँ ने शहर छोड़ा तो सहरा भी छोड़ देनज़्ज़ारे की हवस हो तो लैला भी छोड़ दे
जब इश्क़ सिखाता है
जब इश्क़ सिखाता है आदाब-ए-ख़ुद-आगाहीखुलते हैं ग़ुलामों पर असरार-ए-शहंशाही
अफ़्लाक से आता है
अफ़्लाक से आता है नालों का जवाब आख़िरकरते हैं ख़िताब आख़िर उठते हैं हिजाब आख़िर
न तू ज़मीं के लिए है न आसमाँ के लिए
न तू ज़मीं के लिए है न आसमाँ के लिएजहाँ है तेरे लिए तू नहीं जहाँ के लिए
अनोखी वज़्अ है
अनोखी वज़्अ है सारे ज़माने से निराले हैंये आशिक़ कौन सी बस्ती के या-रब रहने वाले हैं
अगर कज-रौ हैं अंजुम
अगर कज-रौ हैं अंजुम आसमाँ तेरा है या मेरामुझे फ़िक्र-ए-जहाँ क्यूँ हो जहाँ तेरा है या मेरा
गुलज़ार-ए-हस्त-ओ-बूद
गुलज़ार-ए-हस्त-ओ-बूद न बेगाना-वार देखहै देखने की चीज़ इसे बार बार देख
Selected Quotes by Muhammad Iqbal (चुनिंदा उद्धरण)
सितारों से आगे जहाँ और भी हैंअभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैंमजनूँ ने शहर छोड़ा तो सहरा भी छोड़ देनज़्ज़ारे की हवस हो तो लैला भी छोड़ देतिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँमिरी सादगी देख क्या चाहता हूँकभी ऐ हक़ीक़त-ए-मुंतज़र नज़र आ लिबास-ए-मजाज़ मेंकि हज़ारों सज्दे तड़प रहे हैं मिरी जबीन-ए-नियाज़ मेंजब इश्क़ सिखाता है आदाब-ए-ख़ुद-आगाहीखुलते हैं ग़ुलामों पर असरार-ए-शहंशाहीअनोखी वज़्अ है सारे ज़माने से निराले हैंये आशिक़ कौन सी बस्ती के या-रब रहने वाले हैंVideos on Muhammad Iqbal
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