About Parveen Shakir
Parveen Shakir or Parvin Shakir (Urdu: پروین شاکر) (24 November 1952 – 26 December 1994) was an Urdu poet, teacher and a civil servant of the Government of Pakistan. Parveen Shakir started writing at a very young age, penning both prose and poetry, and contributing columns in Urdu newspapers, and a few articles in En…
Selected Quotes
Poetry & Stories
कमाल-ए-ज़ब्त को ख़ुद भी तो आज़माऊँगी
कमाल-ए-ज़ब्त को ख़ुद भी तो आज़माऊँगीमैं अपने हाथ से उस की दुल्हन सजाऊँगी
चारासाजों की अज़ीयत नहीं देखी जाती
चारासाजों की अज़ीयत नहीं देखी जातीतेरे बीमार की हालत नहीं देखी जाती
चारागर भूल गया हो जैसे
चारागर भूल गया हो जैसेअब तो मरना ही दवा हो जैसे
हमने ही लौटने का इरादा नहीं किया
हमने ही लौटने का इरादा नहीं कियाउसने भी भूल जाने का वादा नहीं किया
अब कौन से मौसम से कोई आस लगाए
अब कौन से मौसम से कोई आस लगाएबरसात में भी याद जब न उनको हम आए
About Parveen Shakir
Parveen Shakir: Quick Answers
Who is Parveen Shakir?
Parveen Shakir or Parvin Shakir (Urdu: پروین شاکر) (24 November 1952 – 26 December 1994) was an Urdu poet, teacher and a civil servant of the Government of Pakistan. Parveen Shakir started writing at a very young age, penning both prose and poetry, and contributing columns in Urdu newspapers, and a few articles in En…
When was Parveen Shakir born?
Parveen Shakir was born on 24 November 1952.
When did Parveen Shakir die?
Parveen Shakir passed away on 26 December 1994.
Where can I read Parveen Shakir's poetry?
Kavishala has 35 poems and stories and 50 couplets (sher) by Parveen Shakir, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Parveen Shakir
कमाल-ए-ज़ब्त को ख़ुद भी तो आज़माऊँगी
कमाल-ए-ज़ब्त को ख़ुद भी तो आज़माऊँगीमैं अपने हाथ से उस की दुल्हन सजाऊँगी
चारासाजों की अज़ीयत नहीं देखी जाती
चारासाजों की अज़ीयत नहीं देखी जातीतेरे बीमार की हालत नहीं देखी जाती
चारागर भूल गया हो जैसे
चारागर भूल गया हो जैसेअब तो मरना ही दवा हो जैसे
हमने ही लौटने का इरादा नहीं किया
हमने ही लौटने का इरादा नहीं कियाउसने भी भूल जाने का वादा नहीं किया
अब कौन से मौसम से कोई आस लगाए
अब कौन से मौसम से कोई आस लगाएबरसात में भी याद जब न उनको हम आए
जिद
मैं क्यों उसको फ़ोन करूँ!उसके भी तो इल्म में होगा
बारिश में क्या तन्हा भीगना लड़की
बारिश में क्या तन्हा भीगना लड़की!उसे बुला जिसकी चाहत में
ज़िन्दा रहने की ख़्वाहिश ने मार दिया
दाने तक जब पहुँची चिड़ियाजाल में थी
सजे-सजाये घर की तन्हा चिड़िया
सजे-सजाये घर की तन्हा चिड़िया!तेरी तारा-सी आँखों की वीरानी में
टूटी है मेरी नींद, मगर तुमको इससे क्या
टूटी है मेरी नींद, मगर तुमको इससे क्याबजते रहें हवाओं से दर, तुमको इससे क्या
शाम आयी तेरी यादों के सितारे निकले
शाम आयी तेरी यादों के सितारे निकलेरंग ही ग़म के नहीं नक़्श भी प्यारे निकले
दिल पे एक तरफ़ा क़यामत करना
दिल पे एक तरफ़ा क़यामत करनामुस्कुराते हुए रुखसत करना
Selected Quotes by Parveen Shakir (चुनिंदा उद्धरण)
वो तो ख़ुश-बू है हवाओं में बिखर जाएगा मसअला फूल का है फूल किधर जाएगाहुस्न के समझने को उम्र चाहिए जानाँ दो घड़ी की चाहत में लड़कियाँ नहीं खुलतींमैं सच कहूँगी मगर फिर भी हार जाऊँगी वो झूट बोलेगा और ला-जवाब कर देगाइतने घने बादल के पीछे कितना तन्हा होगा चाँदकुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भीवो न आएगा हमें मालूम था इस शाम भी इंतिज़ार उस का मगर कुछ सोच कर करते रहेCouplets (Sher) by Parveen Shakir
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