About Rajkamal Choudhary
Rajkamal Choudhary was an Indian poet, short story writer, novelist, critic and thinker in Maithili, Hindi and Bengali languages. He was known as "a bold leader of new poetry" and writer who "stands out differently" from most other experimentalists
Selected Quotes
Poetry & Stories
चारों ओर अंधेरा
चारों ओर अंधेरानदी तट पर, मुर्दघट्टी, खेत-खलिहान, जंगल-झाड़ में
एक शब्द : अनुत्तरित-अभिशप्त
मैंने सुनी हैं, टूटे हुए मन्दिरों में कैदभीमाकार घंटियों की ध्वनियाँ
उखड़े हुए लोगों की क्रान्ति
ओ वायु के टूटे हुए पंख,ओ कवि,
हाथ (अमृता शेरगिल के लिए )
वक़्त के ताबूत में सिमट नहीं पाते हैंगर्म उसके सफ़ेद हाथ । लाल फूलों से
तुम मुझे क्षमा करो
बहुत अंधी थीं मेरी प्रार्थनाएँ।मुस्कुराहटें मेरी विवश
About Rajkamal Choudhary
Rajkamal Choudhary: Quick Answers
Who is Rajkamal Choudhary?
Rajkamal Choudhary was an Indian poet, short story writer, novelist, critic and thinker in Maithili, Hindi and Bengali languages.
When was Rajkamal Choudhary born?
Rajkamal Choudhary was born on 13 December 1929.
Where can I read Rajkamal Choudhary's poetry?
Kavishala has 23 poems and stories by Rajkamal Choudhary, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Rajkamal Choudhary
चारों ओर अंधेरा
चारों ओर अंधेरानदी तट पर, मुर्दघट्टी, खेत-खलिहान, जंगल-झाड़ में
एक शब्द : अनुत्तरित-अभिशप्त
मैंने सुनी हैं, टूटे हुए मन्दिरों में कैदभीमाकार घंटियों की ध्वनियाँ
उखड़े हुए लोगों की क्रान्ति
ओ वायु के टूटे हुए पंख,ओ कवि,
हाथ (अमृता शेरगिल के लिए )
वक़्त के ताबूत में सिमट नहीं पाते हैंगर्म उसके सफ़ेद हाथ । लाल फूलों से
तुम मुझे क्षमा करो
बहुत अंधी थीं मेरी प्रार्थनाएँ।मुस्कुराहटें मेरी विवश
इस अकाल बेला में
होश की तीसरी दहलीज़ थी वोहाँ ! तीसरी ही तो थी,
समय के बीते हुए से
प्राप्त कर लेना क्षमा सहज सम्भवनहीं है अब।जल पर नहीं, पिघलेहुए इस्पात पर पड़ती है पाँवों
रिक्शे पर एक सौ रातें
गरदन के नीचे से खींच लिया हाथ।बोली, अन्धकार हयनि (नहीं हुआहै)!
शीला : आइने में
मैंने कब नहीं कहा, वह बदसूरत लड़कीअपना चेहरा सुबह में भी देखती नहीं?
कंकावती-1
नसों की पीली धारियाँ।एक प्यालारोशनी।
भाषा अब वेश्या है
भाषा अब वेश्या है।सबकी बाँहों में समायी हुई,
एक प्रश्न हज़ार उत्तर
मैंने सूरज से पूछाधरती कब आग का गोला बन जाएगी?
Selected Quotes by Rajkamal Choudhary (चुनिंदा उद्धरण)
चारों ओर अंधेरानदी तट पर, मुर्दघट्टी, खेत-खलिहान, जंगल-झाड़ मेंबहुत अंधी थीं मेरी प्रार्थनाएँ।मुस्कुराहटें मेरी विवशगरदन के नीचे से खींच लिया हाथ।बोली, अन्धकार हयनि (नहीं हुआहै)!मैंने कब नहीं कहा, वह बदसूरत लड़कीअपना चेहरा सुबह में भी देखती नहीं?होश की तीसरी दहलीज़ थी वोहाँ ! तीसरी ही तो थी,भाषा अब वेश्या है।सबकी बाँहों में समायी हुई,Videos on Rajkamal Choudhary
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