About Aalok Shrivastav
Alok Shrivastava is a Young Poet and Story Writer. his Compositions published in important literary magazines. His He was honored with 'A and Bheinav Shilpi Samman' for writing Ghazal in the year 2002.Ghazal collection published from Rajkamal Publications, Delhi.
Selected Quotes
Poetry & Stories
वो दौर दिखा जिसमें इन्सान की ख़ूशबू हो
वो दौर दिखा जिसमें इन्सान की ख़ूशबू होअन्सान की आखों में ईमान की खुशबू हो
हम तो ये बात जान के हैरान हैं बहुत
हम तो ये बात जान के हैरान हैं बहुतखामोशियों में शोर के तूफ़ान हैं बहुत
ठीक हुआ जो बिक गए सैनिक
ठीक हुआ जो बिक गए सैनिक मुठ्ठी भर दीनारों में,वैसे भी तो जंग लगा था, पुश्तैनी हथियारों में।
बूढ़ा टपरा, टूटा छप्पर और उस पर बरसातें सच
बूढ़ा टपरा, टूटा छप्पर और उस पर बरसातें सच,उसने कैसे काटी होंगी, लंबी-लंबी रातें सच।
मंज़िल पे ध्यान हमने ज़रा भी अगर दिया
मंज़िल पे ध्यान हमने ज़रा भी अगर दिया,आकाश ने डगर को उजालों से भर दिया।
About Aalok Shrivastav
Aalok Shrivastav: Quick Answers
Who is Aalok Shrivastav?
Alok Shrivastava is a Young Poet and Story Writer. his Compositions published in important literary magazines.
When was Aalok Shrivastav born?
Aalok Shrivastav was born on 30 December 1971.
Where can I read Aalok Shrivastav's poetry?
Kavishala has 16 poems and stories by Aalok Shrivastav, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Aalok Shrivastav
वो दौर दिखा जिसमें इन्सान की ख़ूशबू हो
वो दौर दिखा जिसमें इन्सान की ख़ूशबू होअन्सान की आखों में ईमान की खुशबू हो
हम तो ये बात जान के हैरान हैं बहुत
हम तो ये बात जान के हैरान हैं बहुतखामोशियों में शोर के तूफ़ान हैं बहुत
ठीक हुआ जो बिक गए सैनिक
ठीक हुआ जो बिक गए सैनिक मुठ्ठी भर दीनारों में,वैसे भी तो जंग लगा था, पुश्तैनी हथियारों में।
बूढ़ा टपरा, टूटा छप्पर और उस पर बरसातें सच
बूढ़ा टपरा, टूटा छप्पर और उस पर बरसातें सच,उसने कैसे काटी होंगी, लंबी-लंबी रातें सच।
मंज़िल पे ध्यान हमने ज़रा भी अगर दिया
मंज़िल पे ध्यान हमने ज़रा भी अगर दिया,आकाश ने डगर को उजालों से भर दिया।
मंज़िलें क्या हैं रास्ता क्या है
मंज़िलें क्या हैं रास्ता क्या हैहौसला हो तो फ़ासला क्या है
जाड़े के बर्फ़ीले दिन
जाड़े के बर्फ़ीले दिन,लाल गुलाबी पीले दिन।
ये नफ़्रतों की सदाएँ, वतन का क्या होगा
ये नफ़्रतों की सदाएँ, वतन का क्या होगाहवा में आग बही तो चमन का क्या होगा
इक हुनर है वो भी विरसे में मिला है
इक हुनर है वो भी विरसे में मिला हैदेख लीजे हाँथ में सब कुछ लिखा है
धूप हुई तो आँचल बनकर
धूप हुई तो आँचल बनकर,कोने-कोने छाई अम्मा,
जिन बातों को कहना मुश्किल होता है, उन बातों को सहना मुश्किल होता है.
नई ग़ज़ल l نئی غزلजिन बातों को कहना मुश्किल होता है,
है ज़माना किस क़दर मेरे ख़िलाफ़
है ज़माना किस क़दर मेरे ख़िलाफ़,और उस पर मैं इधर, मेरे ख़िलाफ़.
Selected Quotes by Aalok Shrivastav (चुनिंदा उद्धरण)
नई ग़ज़ल l نئی غزلजिन बातों को कहना मुश्किल होता है,है ज़माना किस क़दर मेरे ख़िलाफ़,और उस पर मैं इधर, मेरे ख़िलाफ़.धूप हुई तो आँचल बनकर,कोने-कोने छाई अम्मा,मंज़िलें क्या हैं रास्ता क्या हैहौसला हो तो फ़ासला क्या हैबूढ़ा टपरा, टूटा छप्पर और उस पर बरसातें सच,उसने कैसे काटी होंगी, लंबी-लंबी रातें सच।ये नफ़्रतों की सदाएँ, वतन का क्या होगाहवा में आग बही तो चमन का क्या होगाVideos on Aalok Shrivastav
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