About Nooh Narvi
Nooh Narvi or Muhammad Noah (1878- 1962 ) was born in district Rae Bareli (Uttar Pradesh). He learnt Arabic and Persian from Mir Najaf Ali and acquired a level of excellence in these languages. He also learnt English. Nuh is well known for his spontaneity and for being a disciple of Dagh and his successor after his de…
Selected Quotes
Poetry & Stories
दिल हमारी तरफ़ से साफ़ करो
दिल हमारी तरफ़ से साफ़ करोजो हुआ सो हुआ मुआफ़ करो
ये मतलब है कि मुज़्तर ही रहूँ
ये मतलब है कि मुज़्तर ही रहूँ मैं बज़्म-ए-क़ातिल मेंतड़पता लोटता दाख़िल हुआ आदाब-ए-महफ़िल में
गर्दूं काँपा थर्राई ज़मीं चैन उन बिन
गर्दूं काँपा थर्राई ज़मीं चैन उन बिन आई मुश्किल सेवो आह क़यामत थी शायद निकली जो मेरे टूटे दिल से
मेरे जीने का तौर कुछ भी नहीं
मेरे जीने का तौर कुछ भी नहींसाँस चलती है और कुछ भी नहीं
ना-रसा आहें मिरी औज-ए-मरातिब पा गईं
ना-रसा आहें मिरी औज-ए-मरातिब पा गईंदिल से निकलीं लब तक आईं आसमाँ पर छा गईं
About Nooh Narvi
Nooh Narvi: Quick Answers
Who is Nooh Narvi?
Nooh Narvi or Muhammad Noah (1878- 1962 ) was born in district Rae Bareli (Uttar Pradesh). He learnt Arabic and Persian from Mir Najaf Ali and acquired a level of excellence in these languages.
When was Nooh Narvi born?
Nooh Narvi was born on 18 September 1878.
When did Nooh Narvi die?
Nooh Narvi passed away on 1 January 1962.
Where can I read Nooh Narvi's poetry?
Kavishala has 28 poems and stories and 100 couplets (sher) by Nooh Narvi, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Nooh Narvi
दिल हमारी तरफ़ से साफ़ करो
दिल हमारी तरफ़ से साफ़ करोजो हुआ सो हुआ मुआफ़ करो
ये मतलब है कि मुज़्तर ही रहूँ
ये मतलब है कि मुज़्तर ही रहूँ मैं बज़्म-ए-क़ातिल मेंतड़पता लोटता दाख़िल हुआ आदाब-ए-महफ़िल में
गर्दूं काँपा थर्राई ज़मीं चैन उन बिन
गर्दूं काँपा थर्राई ज़मीं चैन उन बिन आई मुश्किल सेवो आह क़यामत थी शायद निकली जो मेरे टूटे दिल से
मेरे जीने का तौर कुछ भी नहीं
मेरे जीने का तौर कुछ भी नहींसाँस चलती है और कुछ भी नहीं
ना-रसा आहें मिरी औज-ए-मरातिब पा गईं
ना-रसा आहें मिरी औज-ए-मरातिब पा गईंदिल से निकलीं लब तक आईं आसमाँ पर छा गईं
ताब नहीं सुकूँ नहीं दिल नहीं अब जिगर नहीं
ताब नहीं सुकूँ नहीं दिल नहीं अब जिगर नहींअपनी नज़र किधर उठे कोई इधर उधर नहीं
आप जिन के क़रीब होते हैं
आप जिन के क़रीब होते हैंवो बड़े ख़ुश-नसीब होते हैं
अहल-ए-उल्फ़त से तने जाते हैं
अहल-ए-उल्फ़त से तने जाते हैंरोज़ रोज़ आप बने जाते हैं
अभी कम-सिन हैं मालूमात कितनी
अभी कम-सिन हैं मालूमात कितनीवो कितने और उन की बात कितनी
कोई नहीं पछताने वाला
कोई नहीं पछताने वालामर जाए मर जाने वाला
हर तलबगार को मेहनत का सिला मिलता है
हर तलबगार को मेहनत का सिला मिलता हैबुत हैं क्या चीज़ कि ढूँढे से ख़ुदा मिलता है
दौलत है बड़ी चीज़ हुकूमत है बड़ी चीज़
दौलत है बड़ी चीज़ हुकूमत है बड़ी चीज़इन सब से बशर के लिए इज़्ज़त है बड़ी चीज़
Selected Quotes by Nooh Narvi (चुनिंदा उद्धरण)
अदा आई जफ़ा आई ग़ुरूर आया हिजाब आया हज़ारों आफ़तें ले कर हसीनों पर शबाब आयाहम इंतिज़ार करें हम को इतनी ताब नहीं पिला दो तुम हमें पानी अगर शराब नहींसुनते रहे हैं आप के औसाफ़ सब से हम मिलने का आप से कभी मौक़ा नहीं मिलामिलना जो न हो तुम को तो कह दो न मिलेंगे ये क्या कभी परसों है कभी कल है कभी आजइश्क़ में कुछ नज़र नहीं आया जिस तरफ़ देखिए अँधेरा हैवो ख़ुदाई कर रहे थे जब ख़ुदा होने से क़ब्ल तो ख़ुदा जाने करेंगे क्या ख़ुदा होने के बा'दCouplets (Sher) by Nooh Narvi
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