About Meena Kumari
Meena Kumari (born Mahjabeen Bano; 1 August 1933– 31 March 1972) was an Indian film actress and poet, who worked in Hindi films. Popularly known as The Tragedy Queen She was active between 1939 and 1972. Kumari was described by critics as a "historically incomparable" actress of Hindi cinema. In a career spanning 33 y…
Selected Quotes
Poetry & Stories
मुहब्बत
मुहब्बतबहार की फूलों की तरह मुझे अपने जिस्म के रोएं रोएं से
हाँ, कोई और होगा तूने जो देखा होगा
हाँ, कोई और होगा तूने जो देखा होगाहम नहीं आग से बच-बचके गुज़रने वाले
मेरा माज़ी
मेरा माज़ीमेरी तन्हाई का ये अंधा शिगाफ़
चाँद तन्हा है आसमाँ तन्हा
चाँद तन्हा है आसमाँ तन्हा,दिल मिला है कहाँ-कहाँ तन्हा
ये रात
ये रातये तन्हाई
About Meena Kumari
Meena Kumari: Quick Answers
Who is Meena Kumari?
Meena Kumari (born Mahjabeen Bano; 1 August 1933– 31 March 1972) was an Indian film actress and poet, who worked in Hindi films. Popularly known as The Tragedy Queen She was active between 1939 and 1972.
When was Meena Kumari born?
Meena Kumari was born on 1 August 1933.
When did Meena Kumari die?
Meena Kumari passed away on 31 March 1972.
Where can I read Meena Kumari's poetry?
Kavishala has 19 poems and stories by Meena Kumari, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Meena Kumari
मुहब्बत
मुहब्बतबहार की फूलों की तरह मुझे अपने जिस्म के रोएं रोएं से
हाँ, कोई और होगा तूने जो देखा होगा
हाँ, कोई और होगा तूने जो देखा होगाहम नहीं आग से बच-बचके गुज़रने वाले
मेरा माज़ी
मेरा माज़ीमेरी तन्हाई का ये अंधा शिगाफ़
चाँद तन्हा है आसमाँ तन्हा
चाँद तन्हा है आसमाँ तन्हा,दिल मिला है कहाँ-कहाँ तन्हा
ये रात
ये रातये तन्हाई
आगाज़ तॊ होता है अंजाम नहीं होता
आगाज़ तॊ होता है अंजाम नहीं होताजब मेरी कहानी में वॊ नाम नहीं होता
यूँ तेरी रहगुज़र से दीवानावार गुज़रे
यूँ तेरी रहगुज़र से दीवानावार गुज़रेकाँधे पे अपने रख के अपना मज़ार गुज़रे
पूछते हो तो सुनो, कैसे बसर होती है
पूछते हो तो सुनो, कैसे बसर होती हैरात ख़ैरात की, सदक़े की सहर होती है
टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिली
टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिलीजिसका जितना आँचल था, उतनी ही सौगात मिली
यह न सोचो कल क्या हो
यह न सोचो कल क्या होकौन कहे इस पल क्या हो
सुबह से शाम तलक
सुबह से शाम तलकदुसरों के लिए कुछ करना है
मेरे महबूब
मेरे महबूबजब दोपहर को
Selected Quotes by Meena Kumari (चुनिंदा उद्धरण)
मेरा माज़ीमेरी तन्हाई का ये अंधा शिगाफ़हाँ, कोई और होगा तूने जो देखा होगाहम नहीं आग से बच-बचके गुज़रने वालेपूछते हो तो सुनो, कैसे बसर होती हैरात ख़ैरात की, सदक़े की सहर होती हैटुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिलीजिसका जितना आँचल था, उतनी ही सौगात मिलीचाँद तन्हा है आसमाँ तन्हा,दिल मिला है कहाँ-कहाँ तन्हामेरे महबूबजब दोपहर कोVideos on Meena Kumari
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