About Sarvesh Chandausi
जन्म : १ जुलाई १९४९, चन्दौसी, मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) में शिक्षा : बी. एससी. लेखन : गीत, ग़ज़ल, दोहे, रुबाई, मुक्तक, कहानियाँ काव्य पाठ : कवि सम्मेलन, मुशायरा, रेडियो स्टेशन, तथा दूरदर्शन से काव्यपाठ
Selected Quotes
Poetry & Stories
अगर भूले से
अगर भूले से आ जाती हवाएँ बन्द कमरे में।तो घुट कर मर नहीं पाती दुआएँ बन्द कमरे में।।
कमरे में सजा रक्खा है
कमरे में सजा रक्खा है बेजान परिन्दा।ये देख रहा खिड़की से हैरान परिन्दा।।
ग़म के पैहम
ग़म के पैहम बारिशों से हर ख़ुशी ख़तरे में है।सच तो ये है आदमी की ज़िन्दगी ख़तरे में है।।
ज़ख्म बदन पर
ज़ख् म बदन पर खाते हैं, फिर ज़ख्म भराई देते हैं।हमको तो मजबूर हमेशा लोग दिखाई देते हैं।।
वो जब कोई भंवर पैदा करेगा
वो जब कोई भंवर पैदा करेगा।बचाने का भी घर पैदा करेगा।।
About Sarvesh Chandausi
शिक्षा : बी. एससी.
लेखन : गीत, ग़ज़ल, दोहे, रुबाई, मुक्तक, कहानियाँ
काव्य पाठ : कवि सम्मेलन, मुशायरा, रेडियो स्टेशन, तथा दूरदर्शन से काव्यपाठ
Sarvesh Chandausi: Quick Answers
Who is Sarvesh Chandausi?
जन्म : १ जुलाई १९४९, चन्दौसी, मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) में शिक्षा : बी. एससी.
When was Sarvesh Chandausi born?
Sarvesh Chandausi was born on 1 July 1941.
When did Sarvesh Chandausi die?
Sarvesh Chandausi passed away on 25 May 2020.
Where can I read Sarvesh Chandausi's poetry?
Kavishala has 5 poems and stories by Sarvesh Chandausi, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Sarvesh Chandausi
अगर भूले से
अगर भूले से आ जाती हवाएँ बन्द कमरे में।तो घुट कर मर नहीं पाती दुआएँ बन्द कमरे में।।
कमरे में सजा रक्खा है
कमरे में सजा रक्खा है बेजान परिन्दा।ये देख रहा खिड़की से हैरान परिन्दा।।
ग़म के पैहम
ग़म के पैहम बारिशों से हर ख़ुशी ख़तरे में है।सच तो ये है आदमी की ज़िन्दगी ख़तरे में है।।
ज़ख्म बदन पर
ज़ख् म बदन पर खाते हैं, फिर ज़ख्म भराई देते हैं।हमको तो मजबूर हमेशा लोग दिखाई देते हैं।।
वो जब कोई भंवर पैदा करेगा
वो जब कोई भंवर पैदा करेगा।बचाने का भी घर पैदा करेगा।।
Selected Quotes by Sarvesh Chandausi (चुनिंदा उद्धरण)
ज़ख् म बदन पर खाते हैं, फिर ज़ख्म भराई देते हैं।हमको तो मजबूर हमेशा लोग दिखाई देते हैं।।अगर भूले से आ जाती हवाएँ बन्द कमरे में।तो घुट कर मर नहीं पाती दुआएँ बन्द कमरे में।।कमरे में सजा रक्खा है बेजान परिन्दा।ये देख रहा खिड़की से हैरान परिन्दा।।वो जब कोई भंवर पैदा करेगा।बचाने का भी घर पैदा करेगा।।ग़म के पैहम बारिशों से हर ख़ुशी ख़तरे में है।सच तो ये है आदमी की ज़िन्दगी ख़तरे में है।।Videos on Sarvesh Chandausi
Loading videos…
Books by Sarvesh Chandausi
Loading books…








