About Dadu Dayal
Dadu Dayal ( 1544—1603) was a poet-sant , a religious reformator which have said against formalism and priestcraft.
Selected Quotes
Poetry & Stories
दादू दिया है (दोहे)
दादू दीया है भला, दिया करो सब कोय।घर में धरा न पाइए, जो कर दिया न होय।
अजहूँ न निकसे प्रान कठोर
अजहूँ न निकसे प्रान कठोर .दरसन बिना बहुत दिन बीते सुंदर प्रीतम मोर.
घीव दूध में रमि रह्या व्यापक सब हीं ठौर
घीव दूध में रमि रह्या व्यापक सब हीं ठौरदादू बकता बहुत है मथि काढै ते और
भाई रे! ऐसा पंथ हमारा
भाई रे! ऐसा पंथ हमाराद्वै पख रहितपंथ गह पुरा अबरन एक अघारा
तहाँ मुझ कमीन की कौन चलावै
तहाँ मुझ कमीन की कौन चलावै।जाका अजहूँ मुनि जन महल न पावै।।
About Dadu Dayal
Dadu Dayal: Quick Answers
Who is Dadu Dayal?
Dadu Dayal ( 1544—1603) was a poet-sant , a religious reformator which have said against formalism and priestcraft.
When was Dadu Dayal born?
Dadu Dayal was born on 1 January 1544.
When did Dadu Dayal die?
Dadu Dayal passed away on 1 January 1603.
Where can I read Dadu Dayal's poetry?
Kavishala has 15 poems and stories by Dadu Dayal, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Dadu Dayal
दादू दिया है (दोहे)
दादू दीया है भला, दिया करो सब कोय।घर में धरा न पाइए, जो कर दिया न होय।
अजहूँ न निकसे प्रान कठोर
अजहूँ न निकसे प्रान कठोर .दरसन बिना बहुत दिन बीते सुंदर प्रीतम मोर.
घीव दूध में रमि रह्या व्यापक सब हीं ठौर
घीव दूध में रमि रह्या व्यापक सब हीं ठौरदादू बकता बहुत है मथि काढै ते और
भाई रे! ऐसा पंथ हमारा
भाई रे! ऐसा पंथ हमाराद्वै पख रहितपंथ गह पुरा अबरन एक अघारा
तहाँ मुझ कमीन की कौन चलावै
तहाँ मुझ कमीन की कौन चलावै।जाका अजहूँ मुनि जन महल न पावै।।
मेरे मन भैया राम कहौ
मेरे मन भैया राम कहौ रे॥टेक॥रामनाम मोहि सहजि सुनावै।
बिरहणिकौं सिंगार न भावै
बिरहणिकौं सिंगार न भावै।है कोइ ऐसा राम मिलावै॥टेक॥
तौलगि जिनि मारै तूँ मोहिं-राग: गौरी
राग: गौरीतौलगि जिनि मारै तूँ मोहिं।
संग न छाँडौं मेरा-राग: गौरी
राग: गौरीसंग न छाँडौं मेरा पावन पीव।
राम रस मीठा रे
राम रस मीठा रे, कोइ पीवै साधु सुजाण।सदा रस पीवै प्रेमसूँ सो अबिनासी प्राण॥टेक॥
सोई सुहागनि साँच सिगार
सोई सुहागनि साँच सिगार।तन-मन लाइ भजै भरतार॥टेक॥
तब हम एक भये रे भाई
तब हम एक भये रे भाई।मोहन मिल साँची मति आई॥टेक॥
Selected Quotes by Dadu Dayal (चुनिंदा उद्धरण)
दादू दीया है भला, दिया करो सब कोय।घर में धरा न पाइए, जो कर दिया न होय।राम रस मीठा रे, कोइ पीवै साधु सुजाण।सदा रस पीवै प्रेमसूँ सो अबिनासी प्राण॥टेक॥भाई रे! ऐसा पंथ हमाराद्वै पख रहितपंथ गह पुरा अबरन एक अघाराघीव दूध में रमि रह्या व्यापक सब हीं ठौरदादू बकता बहुत है मथि काढै ते औरमेरे मन भैया राम कहौ रे॥टेक॥रामनाम मोहि सहजि सुनावै।तब हम एक भये रे भाई।मोहन मिल साँची मति आई॥टेक॥Videos on Dadu Dayal
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