अगली सुबह

योगेंद्र गौतमयोगेंद्र गौतम

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रात को जब तुम्हारे केश खो जाएँगे

सघन अँधेरे में

और तुम्हारे चेहरे के आलोक्य से दमकता होगा चाँद

मैं तुम्हारी देह से एक सुबह मथ रहा होऊँगा...

जिसमें तुम्हारी पलकें छूते ही जाग उठेंगे सभी स्वप्न!

योगेंद्र गौतम
About the poet

योगेंद्र गौतम

नई पीढ़ी कवि-लेखक और अनुवादक।

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