मैं दुनिया में तुम्हें ढूँढ़ता हूँ,
तुम में ख़ुद को,
और
ख़ुद में किसी खोई हुई दुनिया को...
खोजने ढूँढ़ने की यह प्रक्रिया
अनवरत चलती रहती है
और मैं
विश्व के भूगोलवेत्ताओं की तरह
इस निष्कर्ष पर जा पहुँचता हूँ
कि पृथ्वी वाकई गोल है...
मैं दुनिया में तुम्हें ढूँढ़ता हूँ,
तुम में ख़ुद को,
और
ख़ुद में किसी खोई हुई दुनिया को...
खोजने ढूँढ़ने की यह प्रक्रिया
अनवरत चलती रहती है
और मैं
विश्व के भूगोलवेत्ताओं की तरह
इस निष्कर्ष पर जा पहुँचता हूँ
कि पृथ्वी वाकई गोल है...

रात को जब तुम्हारे केश खो जाएँगेसघन अँधेरे में
रात फैली है, चाँद खिला हैआज पूरा चाँद है,
बचपन में आकाश के अनगिनत तारे देखकरउन्हें गिनने का ख़याल आता था।
पाते जाने (?) के क्रम में जाने कितना कुछ खो रहे हैं हम!हम खो चुके हैं अपने संबंधी,
मेरी आँखें धरती की आँखों के बहुत बाद खुली हैंपर अपनी आँखें खुलने के बाद मैं इसे जगे ही देखता हूँ