Harishankar Parsai, poet
Sootradhar · Author

Harishankar Parsai

22 August 1924 – 10 August 1995Itarasi, India

  • 3 Poems & Stories
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About Harishankar Parsai

Harishankar Parsai was a Hindi writer. He was a noted satirist and humorist of modern Hindi literature and is known for his simple and direct style. He wrote vyangya. He was born in Jamani village near Itarsi in Hoshangabad district, Madhya Pradesh. He completed his M.A. in Hindi from R.T.M. Nagpur University Satires…

Selected Quotes

नहीं, इस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी इसमें पोशाकें बदलने का गुण नहीं है।
— Harishankar Parsai
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ईश्वर तुम्हें सुख देने की योजना बनाता है, तो ये लोग उसे काटकर दुख देने की योजना बना लेते हैं.
— Harishankar Parsai
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Poetry & Stories

  1. प्रेमचंद के फटे जूते (व्यंग्य): हरिशंकर परसाई

    प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फोटो खिंचा रहे हैं। सिर पर किसी मोटे कपड़े की टोपी, कुरता और धोती पहने हैं। कनपटी चिपकी है, गालों की हड्डियां उभर आई हैं, पर घनी मूंछें चेहरे को भरा-भरा बतलाती हैं।पांवों में केनवस के जूते हैं, जिनके बंद बेतरतीब बंधे हैं। लापरवाही से उपयोग करने पर बंद के सिरों पर की लोहे की पतरी निकल जाती है और छेदों में बंद डालने में परेशानी होती है। तब बंद कैसे भी कस लिए जाते हैं।

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  2. (नया साल) परसाई रचनावाली - हरिशंकर परसाई

    साधो, सन् 1964 गुजर गया और 1965 शुरू हो गया. नए साल के शुरू में शुभकामना देने की परम्परा है. मैं तुम्हें शुभकामना देने में हिचकता हूं. बात यह है साधो, कि कोई शुभकामना अब कारगर नहीं होती. मान लो, मैं कहूं कि ईश्वर नया वर्ष तुम्हारे लिए सुखदायी करें, तो तुुम्हें दुख देनेवाले ईश्वर से ही लड़ने लगेंगे. वे कहेंगे, देखते हैं, तुम्हें ईश्वर कैसे सुख देता है. साधो, कुछ लोग ईश्वर से भी बड़े हो गए हैं. ईश्वर तुम्हें सुख देने की योजना बनाता है, तो ये लोग उसे काटकर दुख देने की योजना बना लेते हैं.साधो, मैं कैसे कहूं कि यह वर्ष तुम्हें सुख दे. सुख देनेवाला न वर्ष है न मैं हूं और न ईश्वर है. सुख और दुख देनेवाले दूसरे हैं. मैं कहूँ कि तुम्हें सुख हो. ईश्वर भी मेरी बात मानकर अच्छी फसल दे! मगर फसल आते ही व्यापारी अनाज दबा दे और कीमतें बढ़ा दे. तो तुम्हें सुख नहीं होगा. इसलिए तुम्हारे सुख की कामना व्यर्थ है.

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  3. खेती - हरिशंकर परसाई

    सरकार ने घोषणा की कि हम अधिक अन्न पैदा करेंगे और एक साल में खाद्य में आत्मनिर्भर हो जाएँगे।दूसरे दिन कागज के कारखानों को दस लाख एकड़ कागज का आर्डर दे दिया गया। जब कागज आ गया, तो उसकी फाइलें बना दी गईं। प्रधानमंत्री के सचिवालय से फाइल खाद्य विभाग को भेजी गई। खाद्य विभाग ने उस पर लिख दिया कि इस फाइल से कितना अनाज पैदा होना है और अर्थ विभाग को भेज दिया।

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