About मुनव्वर राना
मुनव्वर राना (जन्म: 26 नवंबर 1952,मृत्यु: 14 जनवरी 2024, रायबरेली, उत्तर प्रदेश) उर्दू भाषा के साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कविता शाहदाबा के लिये उन्हें सन् 2014 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।[1] वे लखनऊ में रहते हैं। भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समय उनके बहुत से नजदीकी रिश्तेदार और पारिवारिक सद…
Selected Quotes
Poetry & Stories
इश्क़ है तो इश्क़ का इज़हार होना चाहिए
इश्क़ है तो इश्क़ का इज़हार होना चाहिएआप को चेहरे से भी बीमार होना चाहिए
किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई
किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आईमैं घर में सब से छोटा था मिरे हिस्से में माँ आई
भुला पाना बहुत मुश्किल है सब कुछ याद रहता है
भुला पाना बहुत मुश्किल है सब कुछ याद रहता हैमोहब्बत करने वाला इस लिए बरबाद रहता है
बादशाहों को सिखाया है क़लंदर होना
बादशाहों को सिखाया है क़लंदर होनाआप आसान समझते हैं मुनव्वर होना
ख़फ़ा होना ज़रा सी बात पर तलवार हो जाना
ख़फ़ा होना ज़रा सी बात पर तलवार हो जानामगर फिर ख़ुद-ब-ख़ुद वो आप का गुलनार हो जाना
About मुनव्वर राना
भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समय उनके बहुत से नजदीकी रिश्तेदार और पारिवारिक सदस्य देश छोड़कर पाकिस्तान चले गए। लेकिन साम्प्रदायिक तनाव के बावजूद मुनव्वर राना के पिता ने अपने देश में रहने को ही अपना कर्तव्य माना। मुनव्वर राना की शुरुआती शिक्षा-दीक्षा कलकत्ता (नया नाम कोलकाता) में हुई। राना ने ग़ज़लों के अलावा संस्मरण भी लिखे हैं। उनके लेखन की लोकप्रियता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनकी रचनाओं का ऊर्दू के अलावा अन्य भाषाओं में भी अनुवाद हुआ है।
कृतियाँ
मुनव्वर राना की अब तक एक दर्जन से ज्यादा पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें प्रमुख हैं :-
माँ
ग़ज़ल गाँव
पीपल छाँव
बदन सराय
नीम के फूल
सब उसके लिए
घर अकेला हो गया
कहो ज़िल्ले इलाही से
बग़ैर नक़्शे का मकान
फिर कबीर
नए मौसम के फूल
मुनव्वर राना: Quick Answers
Who is मुनव्वर राना?
मुनव्वर राना (जन्म: 26 नवंबर 1952,मृत्यु: 14 जनवरी 2024, रायबरेली, उत्तर प्रदेश) उर्दू भाषा के साहित्यकार हैं। इनके द्वारा रचित एक कविता शाहदाबा के लिये उन्हें सन् 2014 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
When was मुनव्वर राना born?
मुनव्वर राना was born on 26 September 1952. Associated place: रायबरेली, उत्तर प्रदेश, भारत.
When did मुनव्वर राना die?
मुनव्वर राना passed away on 14 January 2024.
Where can I read मुनव्वर राना's poetry?
Kavishala has 45 poems and stories and 50 couplets (sher) by मुनव्वर राना, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by मुनव्वर राना
इश्क़ है तो इश्क़ का इज़हार होना चाहिए
इश्क़ है तो इश्क़ का इज़हार होना चाहिएआप को चेहरे से भी बीमार होना चाहिए
किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई
किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आईमैं घर में सब से छोटा था मिरे हिस्से में माँ आई
भुला पाना बहुत मुश्किल है सब कुछ याद रहता है
भुला पाना बहुत मुश्किल है सब कुछ याद रहता हैमोहब्बत करने वाला इस लिए बरबाद रहता है
बादशाहों को सिखाया है क़लंदर होना
बादशाहों को सिखाया है क़लंदर होनाआप आसान समझते हैं मुनव्वर होना
ख़फ़ा होना ज़रा सी बात पर तलवार हो जाना
ख़फ़ा होना ज़रा सी बात पर तलवार हो जानामगर फिर ख़ुद-ब-ख़ुद वो आप का गुलनार हो जाना
अलमारी से ख़त उस के पुराने निकल आए
अलमारी से ख़त उस के पुराने निकल आएफिर से मिरे चेहरे पे ये दाने निकल आए
कभी ख़ुशी से ख़ुशी की तरफ़ नहीं देखा
कभी ख़ुशी से ख़ुशी की तरफ़ नहीं देखातुम्हारे बा'द किसी की तरफ़ नहीं देखा
मिट्टी में मिला दे कि जुदा हो नहीं सकता
मिट्टी में मिला दे कि जुदा हो नहीं सकताअब इस से ज़ियादा मैं तिरा हो नहीं सकता
हँसते हुए माँ-बाप की गाली नहीं खाते
हँसते हुए माँ-बाप की गाली नहीं खातेबच्चे हैं तो क्यूँ शौक़ से मिट्टी नहीं खाते
दुनिया तिरी रौनक़ से मैं अब ऊब रहा हूँ
दुनिया तिरी रौनक़ से मैं अब ऊब रहा हूँतू चाँद मुझे कहती थी मैं डूब रहा हूँ
अच्छा हुआ कि मेरा नशा भी उतर गया
अच्छा हुआ कि मेरा नशा भी उतर गयातेरी कलाई से ये कड़ा भी उतर गया
जुदा रहता हूँ मैं तुझ से तो दिल बे-ताब रहता है
जुदा रहता हूँ मैं तुझ से तो दिल बे-ताब रहता हैचमन से दूर रह के फूल कब शादाब रहता है
Selected Quotes by मुनव्वर राना (चुनिंदा उद्धरण)
अब जुदाई के सफ़र को मिरे आसान करो तुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करोतुम्हारी आँखों की तौहीन है ज़रा सोचो तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता हैचलती फिरती हुई आँखों से अज़ाँ देखी है मैं ने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी हैअभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा मैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती हैइस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है माँ बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती हैकिसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई मैं घर में सब से छोटा था मिरे हिस्से में माँ आईCouplets (Sher) by मुनव्वर राना
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