About Mirabai
Mirabai , was a 16th-century Hindu mystic poet and devotee of Krishna. She is a celebrated Bhakti saint, particularly in the North Indian Hindu tradition. Mirabai was born into a Rajput royal family in Kudki, Pali district, Rajasthan, India then spent her childhood in Merta, Rajasthan.
Selected Quotes
Poetry & Stories
नहिं भावै थांरो देसड़लो जी रंगरूड़ो
नहिं भावै थांरो देसड़लो जी रंगरूड़ो॥थांरा देसा में राणा साध नहीं छै, लोग बसे सब कूड़ो।
हरि तुम हरो जन की भीर
हरि तुम हरो जन की भीर।द्रोपदी की लाज राखी, तुम बढायो चीर॥
नैना निपट बंकट छबि अटके
नैना निपट बंकट छबि अटके।देखत रूप मदनमोहन को, पियत पियूख न मटके।
मोती मूँगे उतार बनमाला पोई
मोती मूँगे उतार बनमाला पोई॥अंसुवन जल सींचि सींचि प्रेम बेलि बोई।
बादल देख डरी हो
बादल देख डरी हो, स्याम, मैं बादल देख डरीश्याम मैं बादल देख डरी
About Mirabai
Mirabai: Quick Answers
Who is Mirabai?
Mirabai , was a 16th-century Hindu mystic poet and devotee of Krishna. She is a celebrated Bhakti saint, particularly in the North Indian Hindu tradition.
When was Mirabai born?
Mirabai was born on 1 January 1498.
Where can I read Mirabai's poetry?
Kavishala has 28 poems and stories by Mirabai, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Mirabai
नहिं भावै थांरो देसड़लो जी रंगरूड़ो
नहिं भावै थांरो देसड़लो जी रंगरूड़ो॥थांरा देसा में राणा साध नहीं छै, लोग बसे सब कूड़ो।
हरि तुम हरो जन की भीर
हरि तुम हरो जन की भीर।द्रोपदी की लाज राखी, तुम बढायो चीर॥
नैना निपट बंकट छबि अटके
नैना निपट बंकट छबि अटके।देखत रूप मदनमोहन को, पियत पियूख न मटके।
मोती मूँगे उतार बनमाला पोई
मोती मूँगे उतार बनमाला पोई॥अंसुवन जल सींचि सींचि प्रेम बेलि बोई।
बादल देख डरी हो
बादल देख डरी हो, स्याम, मैं बादल देख डरीश्याम मैं बादल देख डरी
पायो जी म्हें तो राम रतन धन पायो।
पायो जी म्हें तो राम रतन धन पायो।वस्तु अमोलक दी म्हारे सतगुरू, किरपा कर अपनायो॥
पग घूँघरू बाँध मीरा नाची रे
पग घूँघरू बाँध मीरा नाची रे।मैं तो मेरे नारायण की आपहि हो गई दासी रे।
श्याम मोसूँ ऐंडो डोलै हो
श्याम मोसूँ ऐंडो डोलै हो।औरन सूँ खेलै धमार, म्हासूँ मुखहुँ न बोले हो॥
तोसों लाग्यो नेह रे प्यारे
तोसों लाग्यो नेह रे प्यारे, नागर नंद कुमार।मुरली तेरी मन हर्यो, बिसर्यो घर-व्यौहार॥
बरसै बदरिया सावन की
बरसै बदरिया सावन की,सावन की मनभावन की ।
हेरी म्हा दरद दिवाणौ
हेरी म्हा दरद दिवाणौम्हारा दरद ना जाण्याँ कोय ।
मन रे पासि हरि के चरन
मन रे पासि हरि के चरन।सुभग सीतल कमल- कोमल त्रिविध - ज्वाला- हरन।
Selected Quotes by Mirabai (चुनिंदा उद्धरण)
बादल देख डरी हो, स्याम, मैं बादल देख डरीश्याम मैं बादल देख डरीनहिं भावै थांरो देसड़लो जी रंगरूड़ो॥थांरा देसा में राणा साध नहीं छै, लोग बसे सब कूड़ो।हरि तुम हरो जन की भीर।द्रोपदी की लाज राखी, तुम बढायो चीर॥नैना निपट बंकट छबि अटके।देखत रूप मदनमोहन को, पियत पियूख न मटके।पायो जी म्हें तो राम रतन धन पायो।वस्तु अमोलक दी म्हारे सतगुरू, किरपा कर अपनायो॥मोती मूँगे उतार बनमाला पोई॥अंसुवन जल सींचि सींचि प्रेम बेलि बोई।Videos on Mirabai
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