About Uday Prakash
Uday Prakash is a Hindi poet, scholar, journalist, translator and short story writer from India. He has worked as administrator, editor, researcher, and TV director. He writes for major dailies and periodicals as a freelancer. He has also received several awards for his collection of short stories, Mohan Das.
Selected Quotes
Poetry & Stories
वे यहीं कहीं है
एक जनवरी, 1989 को सफ़दर की ह्त्या की स्मृति में लिखी गई कवितावे कहीं गए नहीं हैं
तिब्बत
तिब्बत से आये हुएलामा घूमते रहते हैं
आंकड़े
अब से तकरीबन पचास साल हो गए होंगेजब कहा जाता है कि गांधी जी ने अपने अनुयायियों से कहीं कहा था
नींव की ईंट हो तुम दीदी
पीपल होतीं तुमपीपल, दीदी
राजधानी में बैल 1
बादलों को सींग पर उठाएखड़ा है आकाश की पुलक के नीचे
About Uday Prakash
Uday Prakash: Quick Answers
Who is Uday Prakash?
Uday Prakash is a Hindi poet, scholar, journalist, translator and short story writer from India. He has worked as administrator, editor, researcher, and TV director.
When was Uday Prakash born?
Uday Prakash was born on 1 January 1952.
Where can I read Uday Prakash's poetry?
Kavishala has 19 poems and stories by Uday Prakash, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Uday Prakash
वे यहीं कहीं है
एक जनवरी, 1989 को सफ़दर की ह्त्या की स्मृति में लिखी गई कवितावे कहीं गए नहीं हैं
तिब्बत
तिब्बत से आये हुएलामा घूमते रहते हैं
आंकड़े
अब से तकरीबन पचास साल हो गए होंगेजब कहा जाता है कि गांधी जी ने अपने अनुयायियों से कहीं कहा था
नींव की ईंट हो तुम दीदी
पीपल होतीं तुमपीपल, दीदी
राजधानी में बैल 1
बादलों को सींग पर उठाएखड़ा है आकाश की पुलक के नीचे
राजधानी में बैल 2
एक सफ़ेद बादलउतर आया है नीचे
राजधानी में बैल 3
सूर्य सबसे पहले बैल के सींग पर उतराफिर टिका कुछ देर चमकता हुआ
राजधानी में बैल 4
पेसिफ़िक मॉल के ठीक सामनेसड़क के बीचोंबीच खड़ा है देर से
उस दिन गिर रही थी नीम की एक पत्ती
नीम की एक छोटी सी पत्ती हवा जिसे उड़ा ले जा सकती थी किसी भी ओरजिसे देखा मैंने गिरते हुए आंखें बचाकर बायीं ओर
एक अलग सा मंगलवार
वह एक कोई भी दोपहर हो सकती थीकोई-सा भी एक मंगलवार
ताना बाना
हम हैं ताना हम हैं बाना ।हमीं चदरिया, हमीं जुलाहा, हमीं गजी, हम थाना ।
एक अकेले का गाना
धन्य प्रिया तुम जागीं,ना जाने दुख भरी रैन में कब तेरी अंखियां लागीं।
Selected Quotes by Uday Prakash (चुनिंदा उद्धरण)
पीपल होतीं तुमपीपल, दीदीहम हैं ताना हम हैं बाना ।हमीं चदरिया, हमीं जुलाहा, हमीं गजी, हम थाना ।अब से तकरीबन पचास साल हो गए होंगेजब कहा जाता है कि गांधी जी ने अपने अनुयायियों से कहीं कहा थानीम की एक छोटी सी पत्ती हवा जिसे उड़ा ले जा सकती थी किसी भी ओरजिसे देखा मैंने गिरते हुए आंखें बचाकर बायीं ओरएक जनवरी, 1989 को सफ़दर की ह्त्या की स्मृति में लिखी गई कवितावे कहीं गए नहीं हैंधन्य प्रिया तुम जागीं,ना जाने दुख भरी रैन में कब तेरी अंखियां लागीं।Videos on Uday Prakash
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