About Teji Grover
Teji Grover is a Hindi poet, fiction writer,translator and painter. She is regarded as an important voice in Hindi poetry in the generations born after 1950. According to poet and critic Ashok Vajpeyi, "Teji Grover shapes her language away from the prevalent idiom of Hindi poetry. In her poetry language acquires a for…
Selected Quotes
Poetry & Stories
नील मणि मुख
नील मणि मुखपोखर में खड़ा सूर्य
जिस भी सेमल की छीम्बी से उड़ती है वह
जिस भी सेमल की छीम्बी से उड़ती है वहजिस भी दूर्वा की ओसभरी लोच में नम
भाषा के साथ खेल सकते हो
भाषा के साथ खेल सकते हो(खेले भी हो ज़ार-ज़ार उसकी ध्वनियों और नुक्तों से)
तुमने एक फूल को देख लिया है
तुमने एक फूल को देख लिया है तालाब की इन्द्रियों में गुलाबी रिसतेभैंस की कालिख़ से सुबहो-शाम ख़ून पीते हुए जीव
पूरा हो चुका चाँद
पूरा हो चुका चाँदझर चुकी सेमल और टेसू की सुर्ख़ी
About Teji Grover
Teji Grover: Quick Answers
Who is Teji Grover?
Teji Grover is a Hindi poet, fiction writer,translator and painter. She is regarded as an important voice in Hindi poetry in the generations born after 1950.
When was Teji Grover born?
Teji Grover was born on 1 January 1955.
Where can I read Teji Grover's poetry?
Kavishala has 17 poems and stories by Teji Grover, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Teji Grover
नील मणि मुख
नील मणि मुखपोखर में खड़ा सूर्य
जिस भी सेमल की छीम्बी से उड़ती है वह
जिस भी सेमल की छीम्बी से उड़ती है वहजिस भी दूर्वा की ओसभरी लोच में नम
भाषा के साथ खेल सकते हो
भाषा के साथ खेल सकते हो(खेले भी हो ज़ार-ज़ार उसकी ध्वनियों और नुक्तों से)
तुमने एक फूल को देख लिया है
तुमने एक फूल को देख लिया है तालाब की इन्द्रियों में गुलाबी रिसतेभैंस की कालिख़ से सुबहो-शाम ख़ून पीते हुए जीव
पूरा हो चुका चाँद
पूरा हो चुका चाँदझर चुकी सेमल और टेसू की सुर्ख़ी
अभी टिमटिमाते थे
अभी टिमटिमाते थेअब मुँहा-मुँही आग पकड़ते हैं
क्या यही मिला है
क्या यही मिला हैहम भूल जाएँ उसे
कभी वह उतरती है बिम्ब में
कभी वह उतरती है बिम्ब मेंकभी कोरे किसी शब्द में
बेतरह आँख पोंछता है
बेतरह आँख पोंछता हैइस क्षण का ईश्वर
मीलों-मील बँधी हुई धूप में
मीलों-मील बँधी हुई धूप मेंपूसे अनाज के
सरक आती है कान की प्याली में
सरक आती है कान की प्याली मेंसुबह की स्नेह सरीखी धूप
ऊँघतीं हैं
ऊँघतीं हैंदोपहर की कच्ची डगार से
Selected Quotes by Teji Grover (चुनिंदा उद्धरण)
पूरा हो चुका चाँदझर चुकी सेमल और टेसू की सुर्ख़ीअभी टिमटिमाते थेअब मुँहा-मुँही आग पकड़ते हैंतुमने एक फूल को देख लिया है तालाब की इन्द्रियों में गुलाबी रिसतेभैंस की कालिख़ से सुबहो-शाम ख़ून पीते हुए जीवभाषा के साथ खेल सकते हो(खेले भी हो ज़ार-ज़ार उसकी ध्वनियों और नुक्तों से)जिस भी सेमल की छीम्बी से उड़ती है वहजिस भी दूर्वा की ओसभरी लोच में नममीलों-मील बँधी हुई धूप मेंपूसे अनाज केVideos on Teji Grover
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