About Kumar Vishwas
Kumar Vishwas is a celebrated Indian poet and he is on the National Executive of Aam Aadmi Party. He has recited his poetry widely in India and also in USA, Singapore, Japan, and Dubai. He has been awarded certificate of recognition by California State Assembly. His poetry as well as presentation take the audiences on…
Selected Quotes
Poetry & Stories
एक दो दिन मे वो इकरार कहाँ आएगा,
एक दो दिन मे वो इकरार कहाँ आएगा,हर सुबह एक ही अखबार कहाँ आएगा ,
Couplets By Kumar Vishwas
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता हैमगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
जो हर रोज जाता था वो गीत हूं मैं...
मुझसे सुनो खूब गजलें, मधुर गीतमुझसे मेरा मात्र परिचय न पूछो
हम कबीर के वंशज
वे बोले दरबार सजाओवे बोले जयकार लगाओ
प्रतिमाओं में पूजा उलझी
प्रतिमाओं में पूजा उलझीविधियों में उलझा भक्ति योग
About Kumar Vishwas
Kumar Vishwas: Quick Answers
Who is Kumar Vishwas?
Kumar Vishwas is a celebrated Indian poet and he is on the National Executive of Aam Aadmi Party. He has recited his poetry widely in India and also in USA, Singapore, Japan, and Dubai.
When was Kumar Vishwas born?
Kumar Vishwas was born on 10 February 1970. Associated place: Pilkhuwa, Uttar Pradesh.
Where can I read Kumar Vishwas's poetry?
Kavishala has 22 poems and stories and 1 couplets (sher) by Kumar Vishwas, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Kumar Vishwas
एक दो दिन मे वो इकरार कहाँ आएगा,
एक दो दिन मे वो इकरार कहाँ आएगा,हर सुबह एक ही अखबार कहाँ आएगा ,
Couplets By Kumar Vishwas
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता हैमगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
जो हर रोज जाता था वो गीत हूं मैं...
मुझसे सुनो खूब गजलें, मधुर गीतमुझसे मेरा मात्र परिचय न पूछो
हम कबीर के वंशज
वे बोले दरबार सजाओवे बोले जयकार लगाओ
प्रतिमाओं में पूजा उलझी
प्रतिमाओं में पूजा उलझीविधियों में उलझा भक्ति योग
कुमार विश्वास की शायरी | kavishala - कविशाला
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता हैमगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
बात करनी है बात कौन करे | कुमार विश्वास
बात करनी है बात कौन करेदर्द से दो दो हाथ कौन करे
फिर मिरी याद आ रही होगी - कुमार विश्वास
फिर मिरी याद आ रही होगीफिर वो दीपक बुझा रही होगी
ख़ुद को आसान कर रही हो ना - कुमार विश्वास
ख़ुद को आसान कर रही हो नाहम पे एहसान कर रही हो ना
तुम्हें जीने में आसानी बहुत है - कुमार विश्वास
तुम्हें जीने में आसानी बहुत हैतुम्हारे ख़ून में पानी बहुत है
दिल तो करता है ख़ैर करता है - कुमार विश्वास
दिल तो करता है ख़ैर करता हैआप का ज़िक्र ग़ैर करता है
आबशारों की याद आती है - कुमार विश्वास
आबशारों की याद आती हैफिर किनारों की याद आती है
Selected Quotes by Kumar Vishwas (चुनिंदा उद्धरण)
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता हैमगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता हैमुझसे सुनो खूब गजलें, मधुर गीतमुझसे मेरा मात्र परिचय न पूछोप्रतिमाओं में पूजा उलझीविधियों में उलझा भक्ति योगवे बोले दरबार सजाओवे बोले जयकार लगाओएक दो दिन मे वो इकरार कहाँ आएगा,हर सुबह एक ही अखबार कहाँ आएगा ,ख़ुद को आसान कर रही हो नाहम पे एहसान कर रही हो नाCouplets (Sher) by Kumar Vishwas
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