मिरी निगाह को पैहम ये जुस्तुजू क्या है

सयय्द महमूद हसन क़ैसर अमरोहीसयय्द महमूद हसन क़ैसर अमरोही19 Aug 1919 – 3 Aug 2011

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मिरी निगाह को पैहम ये जुस्तुजू क्या है

ये मावरा-ए-हिजाबात-ए-रंग-ओ-बू क्या है

न पूछ राज़-ए-दरून-ए-निगार-ख़ाना-ए-दहर

किसे ख़बर है कि मैं क्या हूँ और तू क्या है

ये हुस्न-ओ-इश्क़ में कैसा है जज़्ब-ए-ना-मा'लूम

मिरे हवास से ये रब्त-ए-रंग-ओ-बू क्या है

वो ख़ून-ए-दिल है रगों में जो खौलता ही रहे

जो अश्क बन के टपक जाए वो लहू क्या है

शहीद-ए-ग़ैरत-ए-इंसानियत के ज़ौक़ से पूछ

लहू बहा के जो पाई वो आबरू क्या है

नमाज़ वो है जो मेहराब-ए-तेग़ में हो अदा

न हो जो ख़ून के दरिया में वो वुज़ू क्या है

हो जिस से तर्बियत-ए-ज़ौक़ चाहिए वो सुख़न

जो तल्ख़ काम बना दे वो गुफ़्तुगू क्या है

कभी तो चाहिए फ़िक्र-ए-नज़ाफ़त-ए-बातिन

रिया के सैद ये ज़ाहिर की शुस्त-ओ-शू क्या है

तिरे हुज़ूर में बे-माएगों का क्या तोहफ़ा

मताअ'-ए-जान है क्या शह-रग-ए-गुलो क्या है

सयय्द महमूद हसन क़ैसर अमरोही
About the poet

सयय्द महमूद हसन क़ैसर अमरोही

उपनाम : 'क़ैसर' मूल नाम : सयय्द महमूद हसन जन्म : 19 Aug 1919 | अमरोहा, उत्तर प्रदेश निधन : 03 Aug 2011 | दिल्ली, भारत

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