आह-ए-दिल-ए-मुज़्तर की तासीर नज़र आई
क्या ख़्वाब-ए-मोहब्बत की ता'बीर नज़र आई
बर्बादी-ए-इंसाँ की तस्वीर नज़र आई
तहज़ीब के क़ुरआन की तफ़्सीर नज़र आई
शायद कि बहार आई
जाँबाज़-ए-मोहब्बत को क्या हुस्न का मंशा है
जीने की इजाज़त है मरने का इशारा है
इज़हार-ए-हक़ीक़त पर ता'ज़ीर का धड़का है
फिर तौक़ नज़र आया ज़ंजीर नज़र आई
फिर जोशिश-ए-वहशत ने की सिलसिला-जुम्बानी
फिर वक़्त की मौजें हैं आमादा-ए-तुग़्यानी
फिर हुस्न को सूझी है क्या मश्क़-ए-सितम-रानी
नाज़ुक सी कलाई में शमशीर नज़र आई
तहज़ीब-ओ-तमद्दुन का उल्टा है वरक़ 'क़ैसर'
हिलता है दिल-ए-गीती लर्ज़ां हैं तबक़ 'क़ैसर'
इंसाँ का लहू पीने फूली है शफ़क़ क़ैसर
अब वक़्त के माथे की तहरीर नज़र आई
शायद कि बहार आई








