About हेमंत शेष
सुपरिचित हिंदी कवि, कला-आलोचक, शौक़िया छायाकार, संपादक और चित्रकार। जन्म : 28/12/1952 | जयपुर, राजस्थान हेमंत शेष का जन्म 25 दिसम्बर 1952 को जयपुर, राजस्थान में एक संपन्न और शिक्षित परिवार में हुआ। पिता पेशे से वकील थे और कविताएँ लिखते थे। कविता-लेखन की प्रेरणा बचपन में पिता से ही मिली। राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से…
Selected Quotes
Poetry & Stories
चित्तौड़गढ़
क़िले की छाया में पहुँचते न पहुँचतेसुनता हूँ हज़ारों चीख़ें आग के रंग से भी ऊँची
अफ़सोस-दर्पण
त्रास गिरते हैं आसमान से गरजते हुए बिजली की तरहऔर मृत्यु, एक नि:शब्द चौकन्नी बिल्ली :
कविता-असंभव
किसी भी रंग को आप नहीं कह सकते लाललाल होने के लिए ज़रूरी है उसका लाल होना
जैसलमेर
महल के अलंकृत छज्जों परलीन होती चिलचिलाती दुपहर
बूँदी
अरावली की हरी देह गिराती है बिंब‘स्वरूपसागर’ ताल के शीशे पर
About हेमंत शेष
सुपरिचित हिंदी कवि, कला-आलोचक, शौक़िया छायाकार, संपादक और चित्रकार।
जन्म : 28/12/1952 | जयपुर, राजस्थान
हेमंत शेष का जन्म 25 दिसम्बर 1952 को जयपुर, राजस्थान में एक संपन्न और शिक्षित परिवार में हुआ। पिता पेशे से वकील थे और कविताएँ लिखते थे। कविता-लेखन की प्रेरणा बचपन में पिता से ही मिली। राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से समाजशास्त्र में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त करने के साथ राजस्थान प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए।
प्रशासनिक सेवा के साथ और सेवानिवृत्ति के बाद से उनकी साहित्यिक-यात्रा अनवरत जारी रही है। हाल के वर्षों में प्रकाशित आधा दर्जन कृतियों के साथ उनकी 28 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हैं जिनमें 13 कविता-संग्रह शामिल हैं। उनकी कविता-यात्रा का आरंभ ‘जारी इतिहास के विरुद्ध’ (1973) शीर्षक लंबी-कविता के प्रकाशन के साथ हुआ। ‘घर-बाहर’, ‘वृक्षों के स्वप्न’, ‘नींद में मोहनजोदड़ो’, ‘अशुद्ध सारंग’, ‘कष्ट के लिए क्षमा’, ‘जगह जैसी जगह’ उनके प्रमुख काव्य-संग्रह हैं। उनके दो नए काव्य-संग्रह ‘प्रायश्चित्त-प्रवेशिका’ और ‘अफ़सोस दर्पण’ शीर्षक से 2018-19 में सामने आए हैं।
उनकी सक्रियता एक कला-आलोचक के रूप में भी रही है। इस क्रम में ‘सौंदर्यशास्त्र के प्रश्न’, ‘कला-विमर्श’, ‘भारतीय कला रूप’, ‘भारतीयता की धारणा’, ‘भारतीय रंगमंच’ आदि उनके संपादन में प्रकाशित कुछ प्रमुख कृतियाँ हैं। वह पेंटिंग्स और फ़ोटोग्राफ़ी में भी रुचि रखते हैं और इन क्षेत्रों में अपने मौलिक कार्य के लिए सराहे गए हैं।
‘जगह जैसी जगह’ काव्य-संग्रह के लिए उन्हें बिहारी सम्मान से पुरस्कृत किया गया।
हेमंत शेष: Quick Answers
Who is हेमंत शेष?
सुपरिचित हिंदी कवि, कला-आलोचक, शौक़िया छायाकार, संपादक और चित्रकार। जन्म : 28/12/1952 | जयपुर, राजस्थान हेमंत शेष का जन्म 25 दिसम्बर 1952 को जयपुर, राजस्थान में एक संपन्न और शिक्षित परिवार में हुआ।
When was हेमंत शेष born?
हेमंत शेष was born on 28 September 1952. Associated place: जयपुर, राजस्थान.
Where can I read हेमंत शेष's poetry?
Kavishala has 20 poems and stories by हेमंत शेष, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by हेमंत शेष
चित्तौड़गढ़
क़िले की छाया में पहुँचते न पहुँचतेसुनता हूँ हज़ारों चीख़ें आग के रंग से भी ऊँची
अफ़सोस-दर्पण
त्रास गिरते हैं आसमान से गरजते हुए बिजली की तरहऔर मृत्यु, एक नि:शब्द चौकन्नी बिल्ली :
कविता-असंभव
किसी भी रंग को आप नहीं कह सकते लाललाल होने के लिए ज़रूरी है उसका लाल होना
जैसलमेर
महल के अलंकृत छज्जों परलीन होती चिलचिलाती दुपहर
बूँदी
अरावली की हरी देह गिराती है बिंब‘स्वरूपसागर’ ताल के शीशे पर
पूर्णिमा
चाँद एक पुरानी पीली बड़ी-सी गेंद नहींचंद्रमा है सौ प्रतिशत
उम्मीदें
मेरे भीतर हाथ से छूट कर गिरता है एक कपमुझे भी बिखेरता मन के फ़र्श पर
मथुरा
बहती जाती और गुम हो जाती हैदोनों में रखी टिमटिमाती लौ
यह एक दिन
यह एक दिन है बिल्कुल दिन कहा जा सके जिसेछतें सूनी पेड़ चुप हवा बंद और धूप
परछाईं
कल की परछाईंगिरती है
अकेला होना
दृश्य मेंलौट कर
रणथंभोर
डूबते काँपते अँधेरे में हमेशा मिल जाता है दूर किसी लालटेन का पेड़क़िले में उम्र की सीढ़ियाँ चढ़ते हैं हम जीवन के ढलान से उतरने के लिए
Selected Quotes by हेमंत शेष (चुनिंदा उद्धरण)
त्रास गिरते हैं आसमान से गरजते हुए बिजली की तरहऔर मृत्यु, एक नि:शब्द चौकन्नी बिल्ली :चाँद एक पुरानी पीली बड़ी-सी गेंद नहींचंद्रमा है सौ प्रतिशतक़िले की छाया में पहुँचते न पहुँचतेसुनता हूँ हज़ारों चीख़ें आग के रंग से भी ऊँचीबहती जाती और गुम हो जाती हैदोनों में रखी टिमटिमाती लौकिसी भी रंग को आप नहीं कह सकते लाललाल होने के लिए ज़रूरी है उसका लाल होनामहल के अलंकृत छज्जों परलीन होती चिलचिलाती दुपहरVideos on हेमंत शेष
Loading videos…
Books by हेमंत शेष
Loading books…








