अतिशयोक्तिपूर्ण

उस्मान ख़ानउस्मान ख़ान12 Jul 1984

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मेरे पास

मंगतों-सी सड़क पर परेशान करती

अर्धविक्षिप्तों की कथाओं

और दुःस्वप्नों के विश्लेषणपरक लेखों के अलावा

कुछ नहीं है—मेरे गाथाकार

तुम मेरे इश्क़ का क़िस्सा सुनाते आए हो,

तुम मेरे इश्क़ का क़िस्सा, अब, कैसे सुनाओगे!

कैसे सुनाओगे उस रात की हाय-हाय,

जब मेरे महबूब की उँगली, पिरामिड के

उस तिकोने पत्थर ने कुचल दी थी—

भच्च!!

चाँद का हाला तड़क गया था—

कच्च!!

मेरे इश्क़ के क़िस्से में,

क्या शाही हँसी का बयान नहीं होगा—अतिशयोक्तिपूर्ण!

उस्मान ख़ान
About the poet

उस्मान ख़ान

नई पीढ़ी के कवि-आलोचक। मूल नाम : उस्मान ख़ान जन्म : 12/07/1984 | मंदसौर, मध्य प्रदेश उस्मान ख़ान नई पीढ़ी के कवि-आलोचक हैं जो अपनी रचनात्मकता के साथ संयम से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से मालवा के लोक–साहित्य पर पी.एच.डी. किया है और फ़ि…

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