प्रेम के दस्तावेज़ों में बाक़ी है
अभी लिखी जानी दास्ताँ उन लोगों की
जिनके जन्म ने निर्धारित किया
उनके मनुष्य होने से पहले
उनका मर्द या औरत होना
और उन्हें लड़ना पड़ा
अपने ही शरीरों से
अपनी अस्मिताओं के लिए
लिखे जाएँगे क़िस्से उन लड़कियों के
जिन्होंने अकूत प्रेम किया लड़कियों से,
लड़कों से, और उनसे भी
जिन्होंने नकारा ये दोनों होना
अभी तो बाक़ी हैं क़िस्से उन लड़कों के
जिनके प्रेम में थी उतनी ही आग
जो धधके तो कलेजों से अश्क गिरें
पर जिन्हें ज़रूरत न हुई
महबूब-ए-बदन की
अंजाम-ए-इश्क़ की ख़ातिर








