About धर्मेश
नई पीढ़ी के कवि-लेखक और अनुवादक जन्म : 09/06/1995 | इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश धर्मेश इलाहाबाद में रहते हैं और अपने दोस्तों से मिलने के लिए हर दूसरे दिन गंगा नदी पार करते हैं। वह बतौर लेखक, संपादक और अनुवादक सक्रिय हैं, और उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अँग्रेज़ी में एमए किया है। वह सेफ़ एक्सेस और इंडिया फ़ेलो रह चुके हैं
Selected Quotes
Poetry & Stories
तुम्हारा प्रेम
हँसते-हँसते तुम्हारी आँखों में उतर आते हैं आँसूमैं थामे रहना चाहता हूँ तुम्हारा चेहरा
लड़कियाँ अक्सर लड़कियों के साथ
लड़कियाँ अक्सर लड़कियों के साथभाग जाया करती हैं
ग़ज़ल की तरह
दोस्तों के नाम लिखे ख़त दुश्मनों को भेज दिएउस तरफ़ से जवाब आने की उम्मीद ज़्यादा थी
मैंने तुमसे
एकमैंने तुमसे माँगा प्रेम
आग
मैं हज़ार बातें कहने वाला इंसानज़रूरत आने पर दो बातें न कह पाया
About धर्मेश
नई पीढ़ी के कवि-लेखक और अनुवादक
जन्म : 09/06/1995 | इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश
धर्मेश इलाहाबाद में रहते हैं और अपने दोस्तों से मिलने के लिए हर दूसरे दिन गंगा नदी पार करते हैं। वह बतौर लेखक, संपादक और अनुवादक सक्रिय हैं, और उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अँग्रेज़ी में एमए किया है। वह सेफ़ एक्सेस और इंडिया फ़ेलो रह चुके हैं
धर्मेश: Quick Answers
Who is धर्मेश?
नई पीढ़ी के कवि-लेखक और अनुवादक जन्म : 09/06/1995 | इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश धर्मेश इलाहाबाद में रहते हैं और अपने दोस्तों से मिलने के लिए हर दूसरे दिन गंगा नदी पार करते हैं। वह बतौर लेखक, संपादक और अनुवादक सक्रिय हैं, और उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अँग्रेज़ी में एमए किया है।
Where can I read धर्मेश's poetry?
Kavishala has 14 poems and stories by धर्मेश, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by धर्मेश
तुम्हारा प्रेम
हँसते-हँसते तुम्हारी आँखों में उतर आते हैं आँसूमैं थामे रहना चाहता हूँ तुम्हारा चेहरा
लड़कियाँ अक्सर लड़कियों के साथ
लड़कियाँ अक्सर लड़कियों के साथभाग जाया करती हैं
ग़ज़ल की तरह
दोस्तों के नाम लिखे ख़त दुश्मनों को भेज दिएउस तरफ़ से जवाब आने की उम्मीद ज़्यादा थी
मैंने तुमसे
एकमैंने तुमसे माँगा प्रेम
आग
मैं हज़ार बातें कहने वाला इंसानज़रूरत आने पर दो बातें न कह पाया
नसों में भर जाता है क्रोध
नसों में भर जाता है क्रोधसत्ता के विरुद्ध
चूमना
तुम्हें चूमना यूँ तो एक सरल क्रिया भी हो सकती थीऐसा संभव था तुम्हें चूमने पर उपमाएँ नहीं उमड़ती
पत्थर हो जाने के बाद
लोग यह सुन-सुन कर थक गएमैं कह-कह कर नहीं थका
प्रेम के दस्तावेज़ों में
प्रेम के दस्तावेज़ों में बाक़ी हैअभी लिखी जानी दास्ताँ उन लोगों की
कविताएँ
ख़त्म हो चुकी हैं कविताएँशब्दों ने कर ली है सामूहिक आत्महत्या
जैसे कविता होती है
जैसे कविता होती है शब्दों के अंतराल मेंहोता है प्रेम अंतराल में देहों के
देह
मुझे नहीं मालूम देह किसी भाषा का सबसे सुंदर शब्द है या नहींहाँ मुझे इतना मालूम है कि तुम्हारी देह मेरी भाषा का सबसे सुंदर शब्द है
Selected Quotes by धर्मेश (चुनिंदा उद्धरण)
प्रेम के दस्तावेज़ों में बाक़ी हैअभी लिखी जानी दास्ताँ उन लोगों कीतुम्हें चूमना यूँ तो एक सरल क्रिया भी हो सकती थीऐसा संभव था तुम्हें चूमने पर उपमाएँ नहीं उमड़तीनसों में भर जाता है क्रोधसत्ता के विरुद्धमैं हज़ार बातें कहने वाला इंसानज़रूरत आने पर दो बातें न कह पायालोग यह सुन-सुन कर थक गएमैं कह-कह कर नहीं थकादोस्तों के नाम लिखे ख़त दुश्मनों को भेज दिएउस तरफ़ से जवाब आने की उम्मीद ज़्यादा थीVideos on धर्मेश
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