About सयय्द महमूद हसन क़ैसर अमरोही
उपनाम : 'क़ैसर' मूल नाम : सयय्द महमूद हसन जन्म : 19 Aug 1919 | अमरोहा, उत्तर प्रदेश निधन : 03 Aug 2011 | दिल्ली, भारत
Selected Quotes
Poetry & Stories
इश्क़ के मुख़्बिर को अपना राज़-दाँ समझा था मैं
इश्क़ के मुख़्बिर को अपना राज़-दाँ समझा था मैंरहज़न-ए-मंज़िल को मीर-ए-कारवाँ समझा था में
शब-ए-फ़ुर्क़त तुम्हारी याद रह रह कर रुलाती है
शब-ए-फ़ुर्क़त तुम्हारी याद रह रह कर रुलाती हैन है दिल को सुकूँ इक दम न नींद आँखों में आती है
मिरी निगाह को पैहम ये जुस्तुजू क्या है
मिरी निगाह को पैहम ये जुस्तुजू क्या हैये मावरा-ए-हिजाबात-ए-रंग-ओ-बू क्या है
ऐसे में तिरी याद आती है - नज़्म
जब चाँदनी खुलती है हर-सू हर ज़र्रा ताबाँ होता हैजब छूट से माह-ओ-अंजुम की दरिया में चराग़ाँ होता है
शायद कि बहार आई - नज़्म
आह-ए-दिल-ए-मुज़्तर की तासीर नज़र आईक्या ख़्वाब-ए-मोहब्बत की ता'बीर नज़र आई
About सयय्द महमूद हसन क़ैसर अमरोही
उपनाम : 'क़ैसर'
मूल नाम : सयय्द महमूद हसन
जन्म : 19 Aug 1919 | अमरोहा, उत्तर प्रदेश
निधन : 03 Aug 2011 | दिल्ली, भारत
सयय्द महमूद हसन क़ैसर अमरोही: Quick Answers
Who is सयय्द महमूद हसन क़ैसर अमरोही?
उपनाम : 'क़ैसर' मूल नाम : सयय्द महमूद हसन जन्म : 19 Aug 1919 | अमरोहा, उत्तर प्रदेश निधन : 03 Aug 2011 | दिल्ली, भारत
When was सयय्द महमूद हसन क़ैसर अमरोही born?
सयय्द महमूद हसन क़ैसर अमरोही was born on 19 August 1919. Associated place: दिल्ली, भारत.
When did सयय्द महमूद हसन क़ैसर अमरोही die?
सयय्द महमूद हसन क़ैसर अमरोही passed away on 3 August 2011.
Where can I read सयय्द महमूद हसन क़ैसर अमरोही's poetry?
Kavishala has 7 poems and stories by सयय्द महमूद हसन क़ैसर अमरोही, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by सयय्द महमूद हसन क़ैसर अमरोही
इश्क़ के मुख़्बिर को अपना राज़-दाँ समझा था मैं
इश्क़ के मुख़्बिर को अपना राज़-दाँ समझा था मैंरहज़न-ए-मंज़िल को मीर-ए-कारवाँ समझा था में
शब-ए-फ़ुर्क़त तुम्हारी याद रह रह कर रुलाती है
शब-ए-फ़ुर्क़त तुम्हारी याद रह रह कर रुलाती हैन है दिल को सुकूँ इक दम न नींद आँखों में आती है
मिरी निगाह को पैहम ये जुस्तुजू क्या है
मिरी निगाह को पैहम ये जुस्तुजू क्या हैये मावरा-ए-हिजाबात-ए-रंग-ओ-बू क्या है
ऐसे में तिरी याद आती है - नज़्म
जब चाँदनी खुलती है हर-सू हर ज़र्रा ताबाँ होता हैजब छूट से माह-ओ-अंजुम की दरिया में चराग़ाँ होता है
शायद कि बहार आई - नज़्म
आह-ए-दिल-ए-मुज़्तर की तासीर नज़र आईक्या ख़्वाब-ए-मोहब्बत की ता'बीर नज़र आई
देहात - नज़्म
उफ़ वो जमुना के क़रीं देहात का दिलकश समाँऊँची-नीची सी वो दीवारें वो कुछ टूटे मकाँ
गंगा का किनारा - नज़्म
ख़ामोश फ़ज़ाओं का वो पुर-कैफ़ नज़ारावो नूर-ए-सहर और वो गंगा का किनारा
Selected Quotes by सयय्द महमूद हसन क़ैसर अमरोही (चुनिंदा उद्धरण)
उफ़ वो जमुना के क़रीं देहात का दिलकश समाँऊँची-नीची सी वो दीवारें वो कुछ टूटे मकाँइश्क़ के मुख़्बिर को अपना राज़-दाँ समझा था मैंरहज़न-ए-मंज़िल को मीर-ए-कारवाँ समझा था मेंख़ामोश फ़ज़ाओं का वो पुर-कैफ़ नज़ारावो नूर-ए-सहर और वो गंगा का किनाराजब चाँदनी खुलती है हर-सू हर ज़र्रा ताबाँ होता हैजब छूट से माह-ओ-अंजुम की दरिया में चराग़ाँ होता हैआह-ए-दिल-ए-मुज़्तर की तासीर नज़र आईक्या ख़्वाब-ए-मोहब्बत की ता'बीर नज़र आईशब-ए-फ़ुर्क़त तुम्हारी याद रह रह कर रुलाती हैन है दिल को सुकूँ इक दम न नींद आँखों में आती हैVideos on सयय्द महमूद हसन क़ैसर अमरोही
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