About लनचेनबा मीतै
मणिपुरी भाषा की ‘युवा कविता धारा’ के प्रतिनिधि कवि। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।
Selected Quotes
Poetry & Stories
About लनचेनबा मीतै
मणिपुरी भाषा की ‘युवा कविता धारा’ के प्रतिनिधि कवि। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।
लनचेनबा मीतै: Quick Answers
Who is लनचेनबा मीतै?
मणिपुरी भाषा की ‘युवा कविता धारा’ के प्रतिनिधि कवि। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।
Where can I read लनचेनबा मीतै's poetry?
Kavishala has 20 poems and stories by लनचेनबा मीतै, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by लनचेनबा मीतै
शब्दों के पार
भाषा तो बस का टिकट हैप्रारंभ से गंतव्य तक के लिए
कर्णफूल हुए बिना झर जाने का दुख
एक आलोकशांत और धीमा
प्रतीक्षा
पूछा फूल नेआग री आग! कब बनोगी फूल तुम
नील-व्योम-सागर
निद्रा देवी नेत्रासन सेउतरकर चली गई हटा काली यवनिका
मैं और इम्फाल नगरी
तुम्हारी धमनियों मेंमैले-कुचैले टीलों के समूह असंख्य
सैनिक का शव
बहे या नहीं तुम्हारी आँखों से आँसूमैंने नहीं देखा सचमुच
निस्तेज सूर्य
अहसास तो है कि आ पहुँची भोरआज़ादी की
फूल से आग
तुम अपरिचित हो फूल की सुगंध से। नहीं आता सूँघना भी।तुम अनजान हो फूलों के रूप से। नहीं जानते उन्हें निहारना भी।
एक दिन
तुम और मैंहम सभी चर्चा करते रहे—
द्वंद्व
जबसे मुझे बोध हुआतबसे मेरी इस काली लेखनी में
आज़ाद पंछी परवाज़ पर
प्रारंभ करते ही स्वातंत्र्य-जागरण गीतजकड़ डाले साहस भरे फैले तुम्हारे हाथ-पाँव
रस्सी का फंदा
फंदारस्सी का फंदा
Selected Quotes by लनचेनबा मीतै (चुनिंदा उद्धरण)
निद्रा देवी नेत्रासन सेउतरकर चली गई हटा काली यवनिकातुम्हारी धमनियों मेंमैले-कुचैले टीलों के समूह असंख्यभाषा तो बस का टिकट हैप्रारंभ से गंतव्य तक के लिएपूछा फूल नेआग री आग! कब बनोगी फूल तुमतुम अपरिचित हो फूल की सुगंध से। नहीं आता सूँघना भी।तुम अनजान हो फूलों के रूप से। नहीं जानते उन्हें निहारना भी।प्रारंभ करते ही स्वातंत्र्य-जागरण गीतजकड़ डाले साहस भरे फैले तुम्हारे हाथ-पाँवVideos on लनचेनबा मीतै
Loading videos…
Books by लनचेनबा मीतै
Loading books…








