जबसे मुझे बोध हुआ
तबसे मेरी इस काली लेखनी में
हे माँ तुम भरती आ रही हो निरंतर
लाल रंग की ही स्याही केवल
मैं कोशिश करता रहा अपने हित
मुड़े-तुड़े इस चीकट पन्ने पर
हरे रंग से लिखने की
इसी कारण है द्वंद्व
मेरे और मेरी लेखनी के मध्य
अनवरत एक-दूसरे से बाज़ी मारने का।








