द्वंद्व

लनचेनबा मीतैलनचेनबा मीतै

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जबसे मुझे बोध हुआ

तबसे मेरी इस काली लेखनी में

हे माँ तुम भरती आ रही हो निरंतर

लाल रंग की ही स्याही केवल

मैं कोशिश करता रहा अपने हित

मुड़े-तुड़े इस चीकट पन्ने पर

हरे रंग से लिखने की

इसी कारण है द्वंद्व

मेरे और मेरी लेखनी के मध्य

अनवरत एक-दूसरे से बाज़ी मारने का।

लनचेनबा मीतै
About the poet

लनचेनबा मीतै

मणिपुरी भाषा की ‘युवा कविता धारा’ के प्रतिनिधि कवि। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

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