एक दिन

लनचेनबा मीतैलनचेनबा मीतै

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तुम और मैं

हम सभी चर्चा करते रहे—

आएगा एक दिन

एक दिन आएगा अवश्य”

बीत गए आज कल और परसों

गुज़र गए सप्ताह महीने और वर्ष

लेकिन :

नहीं आया वह एक दिन

कभी नहीं आया।

लनचेनबा मीतै
About the poet

लनचेनबा मीतै

मणिपुरी भाषा की ‘युवा कविता धारा’ के प्रतिनिधि कवि। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

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