प्रतीक्षा

लनचेनबा मीतैलनचेनबा मीतै

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पूछा फूल ने

आग री आग! कब बनोगी फूल तुम

पूछा आग ने भी

फूल रे फूल! आग तुम हो जाओगे कब

क्योंकि :

दोनों के साथ घटता है ऐसा कभी-कभार ही

आग के फूल और फूल के आग बनने की कथा

बहुत दुर्लभ है इतिहास के पृष्ठों पर

जबकि मौजूद है

फूल, फूल के रूप में

आग, आग के रूप में।

लनचेनबा मीतै
About the poet

लनचेनबा मीतै

मणिपुरी भाषा की ‘युवा कविता धारा’ के प्रतिनिधि कवि। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

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