अहसास तो है कि आ पहुँची भोर
आज़ादी की
लेकिन आया नहीं
सूर्य के प्रकाश का अंश तक
करो मत एक भी सवाल
चुपचाप या सबके सामने
कि पराजय की वह लंबी रात
गुज़ारी किस तरह!
क्योंकि :
साथ-साथ ही तय करना है अभी
सुबह से शाम का यह लंबा सफ़र
सूरज की रोशनी का आभास तक पाए बिना।








