About एम. पी. अप्पन
‘महाकवि’ के रूप में सुप्रतिष्ठित मलयाली कवि।
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‘महाकवि’ के रूप में सुप्रतिष्ठित मलयाली कवि।
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‘महाकवि’ के रूप में सुप्रतिष्ठित मलयाली कवि।
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Kavishala has 20 poems and stories by एम. पी. अप्पन, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by एम. पी. अप्पन
प्रकृति और कवि
आँखों और कलेजे कोआनंदित कर देने हेतु
पीछे की ओर देखा
आधी उम्र बीत गई—यह सोचकर हृदय में
शाश्वत सौंदर्य
प्रिये, मुझे कभी परितृप्ति होती नहीं,तेरे सौंदर्य-सुधारस का
स्वातंत्र्य दिन
सस्मित आगत होता है, तू फिरउज्ज्वल छविमान, हे स्वाधीनता दिन!
कान्ह की छवि
दीखती है छविचहूँ ओर उस कान्ह की,
बाँसुरी
मैं एक बाँसुरी हूँ।मुझमें से, अविराम गति से
आधी रात
यह सारा कर्मलीन जगत्कैसी निश्चल स्थिति में है?
पुण्यतीर्थों के प्रति
आज तुम पावन बनेआज बन गए पूर्णकाम
क्रूश पर
घोर तम में विकलित जगत कोदिया प्रकाश सत्य का
नन्हा शिशु
स्मिताभा से विलसितनन्हा बच्चा! तेरे कोमल मुख पर
कल
हम देखते हैं केवल आज का प्रकाशहम पाते हैं केवल आज की शीतल हवा
मुस्कान का भविष्य
“नहीं चाहिए कवित्त,कविता का नहीं अब भविष्य
Selected Quotes by एम. पी. अप्पन (चुनिंदा उद्धरण)
स्मिताभा से विलसितनन्हा बच्चा! तेरे कोमल मुख परआँखों और कलेजे कोआनंदित कर देने हेतुआधी उम्र बीत गई—यह सोचकर हृदय मेंयह सारा कर्मलीन जगत्कैसी निश्चल स्थिति में है?हम देखते हैं केवल आज का प्रकाशहम पाते हैं केवल आज की शीतल हवादीखती है छविचहूँ ओर उस कान्ह की,Videos on एम. पी. अप्पन
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