पुण्यतीर्थों के प्रति

एम. पी. अप्पनएम. पी. अप्पन

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आज तुम पावन बने

आज बन गए पूर्णकाम

पूजनीय, हे पुण्यतीर्थ!

लयीभूत हो रही है

तुममें शांति रेणु अमल

प्रेनधाम मोहन की तनविभूति

उस भस्म के हर कण में

सच्चिदानंद बीज है।

एक उसकी किरण सक्षम

करने जगत को आलोकित

तुम शुचि-चेतन हो, उसे

दो चराचर को अविरल।

सादर यत्न करो रचने का

एक नव संसार को।

विकसे जिसमें मात्र प्रेम-धन

बनो हे पुण्य तीर्थं कृतकार्य

विश्व के वीर पुत्र की-

गांधी की कामना पूर्ण करो।

एम. पी. अप्पन
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एम. पी. अप्पन

‘महाकवि’ के रूप में सुप्रतिष्ठित मलयाली कवि।

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