क्रूश पर

एम. पी. अप्पनएम. पी. अप्पन

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घोर तम में विकलित जगत को

दिया प्रकाश सत्य का

इसलिए

आप, मूर्ख नियम के खूँटे पर

काँटों का ताज पहने

विश्राम करते हैं!

हाय, क्रूश पर चढ़े हुए रहे,

तब भी ईश्वर से माँगा वर—

“करें क्षमा आप इन्हें भी”

देव, आपकी चोटों से

निकलने वाली, हर बूँद रक्त की

कल करुण रस भरा होकर

फूल बन, फूट निकलेगी

सर्वं सहा धरणी से।

वे चमकते कुसुम, जो त्यागशील हैं

नित्य नवता से

शांति की सुरभि बहाकर

रहेंगे भूमि और स्वर्ग में।

एम. पी. अप्पन
About the poet

एम. पी. अप्पन

‘महाकवि’ के रूप में सुप्रतिष्ठित मलयाली कवि।

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