About Mirza Ghalib
Ghalib, born Mirza Asadullah Baig Khan, was a prominent Urdu and Persian poet during the last years of the Mughal Empire. He used his pen-names of Ghalib and Asad. His honorific was Dabir-ul-Mulk, Najm-ud-Daula. Most notably, he wrote in both Urdu and Persian. His Persian Divan is at least five times longer than his U…
Selected Quotes
Poetry & Stories
मिर्ज़ा ग़ालिब की लोकप्रिय शायरी
हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिनदिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक
आह को चाहिए इक उम्र असर होते तककौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक
दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या हैआख़िर इस दर्द की दवा क्या है
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकलेबहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले
दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त दर्द से भर न आए क्यूँ
दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त दर्द से भर न आए क्यूँरोएँगे हम हज़ार बार कोई हमें सताए क्यूँ
About Mirza Ghalib
Mirza Ghalib: Quick Answers
Who is Mirza Ghalib?
Ghalib, born Mirza Asadullah Baig Khan, was a prominent Urdu and Persian poet during the last years of the Mughal Empire. He used his pen-names of Ghalib and Asad.
When was Mirza Ghalib born?
Mirza Ghalib was born on 27 December 1797. Associated place: Agra.
When did Mirza Ghalib die?
Mirza Ghalib passed away on 15 February 1869.
Where can I read Mirza Ghalib's poetry?
Kavishala has 8 poems and stories by Mirza Ghalib, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by Mirza Ghalib
मिर्ज़ा ग़ालिब की लोकप्रिय शायरी
हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिनदिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक
आह को चाहिए इक उम्र असर होते तककौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक
दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या हैआख़िर इस दर्द की दवा क्या है
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकलेबहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले
दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त दर्द से भर न आए क्यूँ
दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त दर्द से भर न आए क्यूँरोएँगे हम हज़ार बार कोई हमें सताए क्यूँ
न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता
न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होताडुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता
कोई उम्मीद बर नहीं आती
कोई उम्मीद बर नहीं आतीकोई सूरत नज़र नहीं आती
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होताअगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता
Selected Quotes by Mirza Ghalib (चुनिंदा उद्धरण)
हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिनदिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा हैआह को चाहिए इक उम्र असर होते तककौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तकन था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होताडुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होताहज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकलेबहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकलेये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होताअगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होतादिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या हैआख़िर इस दर्द की दवा क्या हैVideos on Mirza Ghalib
Loading videos…
Books by Mirza Ghalib
Loading books…








