हँसते-हँसते तुम्हारी आँखों में उतर आते हैं आँसू
मैं थामे रहना चाहता हूँ तुम्हारा चेहरा
ताकि हर उतरते आँसू भिगोए मेरे हाथ
इन हाथों से थाप पड़े फूलों पर तो ख़ुशबू आए
नदियों से मिले तो उनकी थाह बढ़े
पर्बतों से छुए तों उनका अभिमान बने
हवाओं को देखें तो वे नर्म हो जाएँ
तुम्हारा प्रेम मेरे हृदय में उतरे
इससे पहले कि तुम्हारे आँसू तुम्हारे गालों से सूखें








