Selected Quotes
Poetry & Stories
दिल्ली पूरा देश नहीं
दिखलाओ ओ टी वी वालो!इनको भी तो कभी कहीं
टेलीप्रॉमटर चला नहीं करता है नारों से
गिर पड़ती हैं अक्सरतारीख़ें मीनारों से
है वही विस्मय
छुआ कितनी बार तुमकोअनछुआपन है अभी तक
दिल्ली ही है नहीं देश का चेहरा
झूठ बहुत सारे होतेसचमुच ही
जीवन भर ख़तरों से खेले, अब मरने का डर
आरोही-अवरोही,साँसों का है भारी स्वर
यश मालवीय: Quick Answers
When was यश मालवीय born?
यश मालवीय was born on 18 September 1962. Associated place: कानपुर, उत्तर प्रदेश, भारत.
Where can I read यश मालवीय's poetry?
Kavishala has 25 poems and stories by यश मालवीय, free to read on this page, along with selected quotes you can share.
Poems & Stories by यश मालवीय
दिल्ली पूरा देश नहीं
दिखलाओ ओ टी वी वालो!इनको भी तो कभी कहीं
टेलीप्रॉमटर चला नहीं करता है नारों से
गिर पड़ती हैं अक्सरतारीख़ें मीनारों से
है वही विस्मय
छुआ कितनी बार तुमकोअनछुआपन है अभी तक
दिल्ली ही है नहीं देश का चेहरा
झूठ बहुत सारे होतेसचमुच ही
जीवन भर ख़तरों से खेले, अब मरने का डर
आरोही-अवरोही,साँसों का है भारी स्वर
केवल सजा मुरैठा है
दुपहर का सन्नाटाकड़वे स्वर में ऐंठा है
आश्वासन, भूखे को न्यौते
पग-पग पर आहत समझौतेदादी माँ का पान सुपारी
अम्मा धनिया काट रही है
इसकी उसकी नींद जम्हाईमन से मन की गहरी खाई
कोई इक पेड़ तट का...
कोई इक पेड़ तट काक़द हमारा नाप जाता है
गीत भी अब मन नहीं बहला रहे हैं
अनमने हो,घाव को सहला रहे हैं
दही जमाने को, थोड़ा-सा जामन देना
मन अनमन है, पल भर कोअपना मन देना
जहाँ विलेन ही ख़ुद नायक हो
जहाँ विलेन ही ख़ुद नायक होक्या कहिए ऐसे निज़ाम के
Selected Quotes by यश मालवीय (चुनिंदा उद्धरण)
इसकी उसकी नींद जम्हाईमन से मन की गहरी खाईकोई इक पेड़ तट काक़द हमारा नाप जाता हैमन अनमन है, पल भर कोअपना मन देनाआरोही-अवरोही,साँसों का है भारी स्वरगिर पड़ती हैं अक्सरतारीख़ें मीनारों सेअनमने हो,घाव को सहला रहे हैंVideos on यश मालवीय
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