About हीरेन भट्टाचार्य
हीरेन भट्टाचार्य
Selected Quotes
Poetry & Stories
कविता
जोत-कोड़ डालो इस परती आदमी-ज़मीन कोलोहे के तेज़ फाल से तोड़-तोड़ डालो
बीज
कहीं भी गद्य का उजाला नहीं हैबहुत फ़ीकी पड़ गई मेरी कविता
क्या तुम सुखी हो
मेरे सीने में था गुलाब-बाग़ीचाएक दिन ख़ून से लथपथ एक गुलाब ने
कविता के लिए : एकांत प्रार्थना
कठोरता से ठोकर खाकर लौट आती है कवि की आवाज़,प्रतिद्वंद्वीविहीन
पृथ्वी मेरी कविता
मेरी क़लम लोहार के हाथ का हथौड़ा, ठोंक-पीट कर बनाता हूँ शब्दकिसान के फाल जैसा पैना; हलरेखा में सोने की सीता,
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Poems & Stories by हीरेन भट्टाचार्य
कविता
जोत-कोड़ डालो इस परती आदमी-ज़मीन कोलोहे के तेज़ फाल से तोड़-तोड़ डालो
बीज
कहीं भी गद्य का उजाला नहीं हैबहुत फ़ीकी पड़ गई मेरी कविता
क्या तुम सुखी हो
मेरे सीने में था गुलाब-बाग़ीचाएक दिन ख़ून से लथपथ एक गुलाब ने
कविता के लिए : एकांत प्रार्थना
कठोरता से ठोकर खाकर लौट आती है कवि की आवाज़,प्रतिद्वंद्वीविहीन
पृथ्वी मेरी कविता
मेरी क़लम लोहार के हाथ का हथौड़ा, ठोंक-पीट कर बनाता हूँ शब्दकिसान के फाल जैसा पैना; हलरेखा में सोने की सीता,
धूप में झिलमिलाना
(मैं अब भी गीत सुन कर रुक जाता हूँ)कविता शुरू करना कठिन है
मेरा यह शब्दसमूह
(तरुण कवियों के हाथ में)स्वप्न-वाटिका छूकर आते हुए मेरे इन शब्दों में जीवन-धारा की सुषमा
अनाज की सुदृश्य वर्णमाला
जोत-कोड़ कर मुझमें छीट दो अनाज के बीजआँसू से पटाऊँगा पथरीली ज़मीन
अनाज ही सत्य है तुम अनाज की मिसाल हो
मौसम बहुत सूखा हैहवा में पथक उठा मेरी साँस के नीचे का गुप्त बारुदख़ाना
बोध का अक्षर
मुझे भी अपना प्रेमी बना लोकातर देह में खेले वसंत-हवा
देश और अन्य विषय
एकदेश के नाम पर आदेश नहीं चाहिए
सपनों के दाएँ-बाएँ
अनाज का बीज सँभालकर रखे हैं मैंनेजाड़ा बीत जाए, चैत की धूप जला दे कीटाणु
Selected Quotes by हीरेन भट्टाचार्य (चुनिंदा उद्धरण)
जोत-कोड़ कर मुझमें छीट दो अनाज के बीजआँसू से पटाऊँगा पथरीली ज़मीनमेरे सीने में था गुलाब-बाग़ीचाएक दिन ख़ून से लथपथ एक गुलाब ने(तरुण कवियों के हाथ में)स्वप्न-वाटिका छूकर आते हुए मेरे इन शब्दों में जीवन-धारा की सुषमा(मैं अब भी गीत सुन कर रुक जाता हूँ)कविता शुरू करना कठिन हैकहीं भी गद्य का उजाला नहीं हैबहुत फ़ीकी पड़ गई मेरी कविताकठोरता से ठोकर खाकर लौट आती है कवि की आवाज़,प्रतिद्वंद्वीविहीनVideos on हीरेन भट्टाचार्य
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