About हेमंत कुकरेती
सुपरिचित कवि। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित। मूल नाम : हेमंत कुकरेती जन्म : 13/03/1965 | गढ़वाल, उत्तराखंड
Selected Quotes
Poetry & Stories
सिलबट्टा
जाने कहाँ की सभ्यता से निकला है वहपत्थर नहीं है वह केवल
सबसे पहले
मैं एक मनुष्य हूँशरीर के लिए मेरा जन्म नहीं हुआ
चाँद पर नाव
आओ! चाँद पर नाव चलाते हैंउसने गंभीर होकर कहा
नया बस्ता
उसका रंग चटक हैउसके प्रेम में देखते ही पड़ गया था बच्चा
कवियों के बारे में
कवियों के बारे में कोई कवितासारा कुछ नहीं बताती
About हेमंत कुकरेती
सुपरिचित कवि। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित।
मूल नाम : हेमंत कुकरेतीजन्म : 13/03/1965 | गढ़वाल, उत्तराखंड
सुपरिचित कवि। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित। हेमंत कुकरेती was born on 13 March 1965. Associated place: गढ़वाल, उत्तराखंड. Kavishala has 15 poems and stories by हेमंत कुकरेती, free to read on this page, along with selected quotes you can share.हेमंत कुकरेती: Quick Answers
Who is हेमंत कुकरेती?
When was हेमंत कुकरेती born?
Where can I read हेमंत कुकरेती's poetry?
Poems & Stories by हेमंत कुकरेती
सिलबट्टा
जाने कहाँ की सभ्यता से निकला है वहपत्थर नहीं है वह केवल
सबसे पहले
मैं एक मनुष्य हूँशरीर के लिए मेरा जन्म नहीं हुआ
चाँद पर नाव
आओ! चाँद पर नाव चलाते हैंउसने गंभीर होकर कहा
नया बस्ता
उसका रंग चटक हैउसके प्रेम में देखते ही पड़ गया था बच्चा
कवियों के बारे में
कवियों के बारे में कोई कवितासारा कुछ नहीं बताती
दूसरे बच्चे
जब वे अपने बच्चे के लिएखिलौने ख़रीद रहे होते हैं
अंतिम खिलाड़ी
अंतिम खिलाड़ी टीम को संपूर्ण करता हैमुझसे पहले जो आए वे बेहतर रहे होंगे
कुछ बच्चे और कई बच्चे
बिस्कुट जैसी होती है बच्चों की हँसीऔर ग़ुस्सा चॉकलेट की तरह
जागर
यह अंगार चखता रहामैं पानी पीते-पीते
पेपरवेट
उसे वैसा ही होना चाहिएजैसा आमतौर पर होता है
मैंने चाँद को दिखाते हुए पानी पिया
चाँद पूरा थाउमस पृथ्वी की देह से होकर पहुँच रही थी उस तक
हमें दूर करने के लिए
सब मिले हुए हैंजैसे शरीर के हर हिस्से में
Selected Quotes by हेमंत कुकरेती (चुनिंदा उद्धरण)
आओ! चाँद पर नाव चलाते हैंउसने गंभीर होकर कहाजाने कहाँ की सभ्यता से निकला है वहपत्थर नहीं है वह केवलमैं एक मनुष्य हूँशरीर के लिए मेरा जन्म नहीं हुआजब वे अपने बच्चे के लिएखिलौने ख़रीद रहे होते हैंबिस्कुट जैसी होती है बच्चों की हँसीऔर ग़ुस्सा चॉकलेट की तरहचाँद पूरा थाउमस पृथ्वी की देह से होकर पहुँच रही थी उस तकVideos on हेमंत कुकरेती
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