कवियों के बारे में

हेमंत कुकरेतीहेमंत कुकरेती13 Mar 1965

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कवियों के बारे में कोई कविता

सारा कुछ नहीं बताती

जैसे शब्दों के सिलसिले में

अधूरे हैं तमाम शब्दकोश

कवि मुश्किल से खुलते हैं

उन्हें अपनी आँखों की तरह खोलना चाहिए

भीड़ में वे रूठे हुए मिलते हैं

बेहद चुप!

अकेले में उनसे मिलो तो कम नहीं होती

उनकी बेचैनी

कुछ ही होते हैं ऐसे कवि

जिन्हें सँभालकर रखना चाहिए

फिर भी वे ज़्यादा देर तक नहीं बचते

कई कवि

अन्य कारणों से कवि कहलाते हैं

उन्हें पहचानकर उनसे बात न करो तो

समाज का स्वास्थ्य ठीक रहता है

शब्दों की रोटी खाते हैं कुछ कवि

कुछ शब्दों का संहार करते हैं

चमकदार बातें करने वाले ऐसे कवि

अपने आप ही भुला दिए जाते हैं

अपनी कविता को लेकर वाचाल कवि

अक्सर आलोचक हो जाते हैं

उनका मुहावरा उनके फ़ोन-नंबर से

समझ आता है

हमारे समय में जन्म-स्थान से तय होता है

किसी का कवि होना

ऐसे में जो कवि यह नहीं सोचते कि

महान् होने के लिए उन्हें कहाँ मरना चाहिए

वे चुपचाप लिखते हैं जीवन की कविता

वही करते हैं शब्दों के द्वारा बड़ी लड़ाई संभव

कवियों के बारे में

कोई पूरी तरह नहीं जानता

ऐसे कवि इसे जानते हैं और लिखते हैं

हेमंत कुकरेती
About the poet

हेमंत कुकरेती

सुपरिचित कवि। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित। मूल नाम : हेमंत कुकरेती जन्म : 13/03/1965 | गढ़वाल, उत्तराखंड

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