हमें दूर करने के लिए

हेमंत कुकरेतीहेमंत कुकरेती13 Mar 1965

1 min read · 12.4K reads

सब मिले हुए हैं

जैसे शरीर के हर हिस्से में

उसे नष्ट करने वाले कारक आपस में मिले रहते हैं

अकेला करने के बाद डराते हैं

और कभी डराकर करते हैं अकेला

वे चोरी नहीं करते घर में हमारी जगह रहते हैं

सुई तक नहीं छूते

क्योंकि बाद में सब चीज़ों के साथ वह भी उनकी ही होगी

वे ज़िंदा रहने लायक़ अन्न जल देते हैं हमें

कि हमारे अभी मरने से सब चीज़ें नहीं मिलेंगी उन्हें

जिनसे दोस्ती थी वे एक-एक करके हटा दिए गए

जो डराते थे उन्हें दोस्तों की तरह मिलवाया जा रहा है

इन्हें भी एक दिन मार दिया जाएगा

अभी तो हमारी आदतें सीख रहे हैं

नक़ल करते-करते जब वे सचमुच हमारे नज़दीक आ जाएँगे

उन्हें कितनी दूर करना है यह भी सोचा जा चुका है

अभी सब मिले हुए हैं हमें अलग-अलग करने को

जब हम टूट नहीं सकेंगे ये सब चूर-चूर हो जाएँगे

हेमंत कुकरेती
About the poet

हेमंत कुकरेती

सुपरिचित कवि। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित। मूल नाम : हेमंत कुकरेती जन्म : 13/03/1965 | गढ़वाल, उत्तराखंड

View profile & all 15 Poems / Stories

More Poetry & Stories You May Like