सब मिले हुए हैं
जैसे शरीर के हर हिस्से में
उसे नष्ट करने वाले कारक आपस में मिले रहते हैं
अकेला करने के बाद डराते हैं
और कभी डराकर करते हैं अकेला
वे चोरी नहीं करते घर में हमारी जगह रहते हैं
सुई तक नहीं छूते
क्योंकि बाद में सब चीज़ों के साथ वह भी उनकी ही होगी
वे ज़िंदा रहने लायक़ अन्न जल देते हैं हमें
कि हमारे अभी मरने से सब चीज़ें नहीं मिलेंगी उन्हें
जिनसे दोस्ती थी वे एक-एक करके हटा दिए गए
जो डराते थे उन्हें दोस्तों की तरह मिलवाया जा रहा है
इन्हें भी एक दिन मार दिया जाएगा
अभी तो हमारी आदतें सीख रहे हैं
नक़ल करते-करते जब वे सचमुच हमारे नज़दीक आ जाएँगे
उन्हें कितनी दूर करना है यह भी सोचा जा चुका है
अभी सब मिले हुए हैं हमें अलग-अलग करने को
जब हम टूट नहीं सकेंगे ये सब चूर-चूर हो जाएँगे








