अंतिम खिलाड़ी

हेमंत कुकरेतीहेमंत कुकरेती13 Mar 1965

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अंतिम खिलाड़ी टीम को संपूर्ण करता है

मुझसे पहले जो आए वे बेहतर रहे होंगे

मैं भी अपनी जगह ज़रूरी हूँ

यह जगह का प्रश्न नहीं

उस जगह किए गए काम का है

अंत में थोड़ा-सा भी बेहतर कोई कर दे

तो सबको याद रह जाता है

लेकिन लोग ग़लत तरीक़े से याद रखते हैं

जल्दी भुला देते हैं अच्छे किए हुए को

मामूली ग़लती को भी भूलने नहीं देते

मुझे याद है मैंने नहीं चुनी अपनी यह जगह

इसी में अच्छा लगता रहा मुझे कि

हम सबसे बेहतर और भी हैं कई

जिनकी नहीं होती कोई भी जगह

जगह जो मैंने हासिल की

उसमें इतना कर सकूँ कि

लगे अपनी जगह पर मैं ग़लत नहीं हूँ

खेलने वाले भी हम हैं

खिलाने वाले भी

पर यह सोच मुझे अधूरा नहीं रहने देती

कि किसी भी जगह खेलो

अच्छा खेलो

अच्छा खेलकर सोचो कि

कल इससे भी अच्छा खेलना है

नहीं तो हम सबसे बड़ा है खेल

और हम कहाँ के खिलाड़ी हैं

उसके बिना

हेमंत कुकरेती
About the poet

हेमंत कुकरेती

सुपरिचित कवि। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित। मूल नाम : हेमंत कुकरेती जन्म : 13/03/1965 | गढ़वाल, उत्तराखंड

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